जून आपदा में धारचूला तहसील के तीन कस्बों का नामोनिशान मिट गया। धारचूला, मुनस्यारी के 10 स्कूल जलप्रलय में क्षतिग्रस्त हो गए। पढ़ाई न होने से इन मासूमों के सपने पर ब्रेक लग गया है।
मरम्मत का काम शुरू नहीं हो पाया
करीब साढ़े चार माह बीतने के बाद भी क्षतिग्रस्त स्कूलों की मरम्मत का काम शुरू नहीं हो पाया है। स्कूलों की मरम्मत न होने से पढ़ाई प्रभावित हो गई है। खिम और कंज्योती के 25 बच्चों की तो पढ़ाई ही छूट गई है। ये बच्चे साढ़े चार माह से धारचूला के आपदा राहत शिविर में रह रहे हैं।
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16-17 जून की रात जलप्रलय में सोबला, खिम और न्यू कस्बे का नामोनिशान मिट गया। इन तीनों स्थानों पर जो प्राथमिक पाठशालाएं थीं वे सभी बह गईं। इन गांवों के लोग आपदा में अपना सबकुछ खोने के बाद धारचूला चले आए। अभिभावकों ने अपने प्रयासों से बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था की है।
पढ़ाई ही छूट गई
जीआईसी धारचूला के राहत शिविर में रह रहे खिम और कंज्योति के 25 बच्चों की तो पढ़ाई ही छूट गई है। धारचूला के राहत शिविर में रह रहे खिम, कंज्योती के तेज सिंह, पार्वती देवी, भूप सिंह, सरिता देवी कहती हैं कि आपदा के बाद से हमारे बच्चे शिविर में बगैर पढ़ाई के रह रहे हैं। उन्होंने जो कुछ स्कूलों में सीखा था, वे उसे भी भूल गए हैं।
सरकार ने उन्हें बाढ़ में बह गए उनके मकानों और जमीन का अब तक मुआवजा नहीं दिया है। उनका कहना है कि उन्हें ऐसा लग रहा है कि वे अपने नहीं पराए देश में रह रहे हैं।
आपदा में जौलीजीबी, मुनस्यारी के मदकोट, गूठी, पांगरपानी, पापड़ी, घरूड़ी और क्वीरीजिमिया प्राथमिक स्कूल, धापा के जूनियर हाईस्कूल को भी काफी क्षति पहुंची थी। इन स्कूलों की मरम्मत का काम भी बहुगुणा सरकार शुरू नहीं करा पाई है। इन स्कूलों के बच्चे अन्यत्र भवनों अथवा खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
...हमारा तो स्कूल ही बह गया
धारचूला जीआईसी के राहत शिविर में रह रहे खिम, कंज्योती गांव के मनीष (4), पूजा (4), चांदनी (6) से जब स्कूल जाने के बारे में अमर उजाला के संवाददाता ने पूछा तो सभी मासूमों का कहना था कि उनका स्कूल तो बह गया है। बच्चों की ऐसी हालत किसी की भी आंख में आंसू ला सकती है।
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