12 दुकानें मलबे में समा गईं
बुरसोल के प्रधान कैप्टन रणजीत सिंह फर्स्वाण ने बताया कि दो बजे रात्रि को घटना की जानकारी आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम और राजस्व उपनिरीक्षक डुंग्री को सूचना दी गई। हालांकि थराली से ढाडरबगड़ तक 27 किमी सड़क कई जगह सड़क टूटने की वजह से राहत और बचाव दल के कर्मी करीब नौ बजे यहां पहुंचे। जिलाधिकारी आशीष जोशी भी दोपहर में ढाडरबगड़ पहुंचे।
नुकसान का लिया जा रहा है जायजा
थराली के ढाडरबगड़ पहुंचे एसडीएम रोहित मीणा ने बताया कि बादल फटने से हुए नुकसान का जायजा लिया जा रहा है। अब तक कैलाश चंद्र, मदन सिंह, बीरेद्र सिंह पुत्र सज्जन सिंह, बीरेंद्र सिंह पुत्र हुकुम सिंह, राम सिंह, हयात सिंह, मोहन सिंह, जयपाल सिंह, महावीर सिंह और भगवान सिंह की दुकानें, दिनेश सिंह, महावीर सिंह, मुकेश सिंह और मुकेश सिंह के टैक्सी वाहन, हुकुम सिंह सहित एक अन्य की कार, कमल सिंह, सुरेंद्र सिंह की बाइक बहने की पुष्टि हुई हैं।
अन्य बही हुई दुकानों, कार और मोटर बाइक की पुष्टि की जा रही है। घुम्मड़ गांव में देवानंद चंदोला, बासवानंद और जयदत्त चंदोला का आवासीय मकान भी क्षतिग्रस्त हो गया है।
ऊखीमठ में रविवार देर रात्रि को तेज बारिश के बीच वज्रपात से मध्य हिमालय के उच्च क्षेत्रों में दो अलग-अलग स्थानों पर 350 से अधिक भेड़-बकरियों की मौत हो गई। इस दौरान दो भेड़पालकों के भी घायल होने की सूचना है। उप जिलाधिकारी ने रेस्क्यू टीमें गठित कर क्षेत्र के लिए रवाना कर दी गई हैं। यह टीमें नुकसान का जायजा लेकर अपनी रिपोर्ट तहसील को देंगी।
देर रात्रि करीब 2 बजे ग्राम पंचायत बुरूवा से करीब 20 किमी मध्य हिमालय क्षेत्र में बिसुड़ी ताल के छजमानी में वज्रपात से 200 भेड़-बकरियां मर गई थी। घटना के बारे में वहां मौजूद भेड़पालक बीरेंद्र सिंह द्वारा गांव में सूचना दी गई। इस पर, ग्रामीणों ने उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान को फोन पर घटना के बारे में बताया। उधर, भादड़ी में भी अतिवृष्टि से 150 भेड़-बकरियों की मौत हो गई। भेड़पालक हीरा सिंह द्वारा घटना की जानकारी अपने गांव में दी गई। उन्होंने बताया कि आसमानी बिजली की चपेट में आने से भेड़पालक देवेंद्र सिंह व आलम सिंह भी घायल हुए हैं।
इधर, सोमवार को उप जिलाधिकारी चौहान ने दोनों क्षेत्रों के लिए राजस्व, वन और पशुपालन विभाग के कर्मचारियों के साथ एसडीआरएफ के जवानों की दो टीमें गठित की। बिसुड़ी ताल के लिए रवाना की गई टीम में राजस्व विभाग के 4, वन विभाग के 2, एसडीआरएफ के 2, पशुपालन के 2 कर्मचारी शामिल हैं। जबकि भादड़ी के लिए गठित टीम में राजस्व विभाग के 4, एसडीआरएफ के 1, पशुपालन के 1 व वन विभाग के 1 सदस्य की टीम गठित की गई है।
दोनों टीमें क्षेत्र में भेड़-बकरियों को मौत की सही सूचना और क्षेत्र में हुए नुकसान का सही जायजा लेकर अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौपेंगी। एसडीएम ने बताया कि दो भेड़पालकों के घायल होने की बात भी कही जा रही है, जिसमें एक लकवाग्रस्त हो गया है। पूरी स्थिति टीम के वहां पहुंचने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। इधर, सूचना पर सारी, गैड, बष्टी आदि गांवों से भी काफी संख्या में ग्रामीण बिसुड़ी व भादड़ी के लिए रवाना हो गए हैं। बता दें कि ग्रीष्मकाल में गांवों के भेड़पालक अपने भेड़-बकरियों के साथ बुग्याली क्षेत्रों में चले जाते हैं। जहां वे मानसून सीजन तक रहते हैं। सर्दियां शुरू होते ही ये चरवाहे अपने पशुओं के साथ वापस लौटने लगते हैं।
तीन घंटे की मशक्कत के बाद सुचारु किया गया हाईवे
जोशीमठ/पीपलकोटी में बदरीनाथ हाईवे सोमवार को पांच घंटे बाधित रहा। यहां रविवार को रात्रि को हुई बारिश से लामबगड़ भूस्खलन जोन और पीपलकोटी के मंगरीगाड़ में भारी मलबा आने से हाईवे बाधित हो गया। जिसके बाद नौ बजे हाईवे वाहनों की आवाजाही सुचारु हो सकी।
रविवार रात्रि को जिले जोशीमठ और पीपलकोटी क्षेत्रों में हुई मूसलाधार बारिश से बदरीनाथ हाईवे पर लामबगड़ भूस्खलन जोन पर भारी मलबा हाईवे पर आ गया। सुबह पांच बजे जब हाईवे पर वाहनों की आवाजाही शुरू हुई तो लामबगड़ में हाईवे अवरुद्ध होने की जानकारी मिली। जिसके बाद एनएच की मशीनों और मजदूरों ने यहां साढे छह बजे हाईवे सुधारीकरण कार्य शुरु किया।
यहां करीब साढे तीन घंटे की मशक्कत के बाद हाईवे को वाहनों की आवाजाही के लिये सुचारु किया गया। वहीं पीपलकोटी में रात्रि को मलबा आने से अवरुद्ध हुए बदरीनाथ हाईवे को एनएच इकाई की ओर से सुबह 7 बजकर 35 मिनट पर वाहनों की आवाजाही के लिये सुचारु किया गया। इस दौरान नीती घाटी से लौट रही पुलिस अधीक्षक तृप्ती भट्ट भी करीब आधा घंटे तक जाम में फंसी रही। वहीं तीर्थयात्री भी इस दौरान अपने वाहनों में हाईवे खुलने का इंतजार करते रहे।