सरकारी जनकल्याण की योजनाएं किस कदर संबंधित विभागों की मनमानी से प्रभावित करती हैं, इसका उदाहरण है बुजुर्ग और दिव्यांगों के लिए दी जा रही पेंशन।
पेंशन वितरण में अनियमितताओं पर नकेल कसने के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता इन लाभार्थियों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। कई ऐसे बुजुर्ग हैं, जो चलने में असमर्थ हैं तो कई ऐसे दिव्यांग हैं जो बिस्तर पर हैं। उनका एकमात्र सहारा समाज कल्याण विभाग से मिलने वाली पेंशन है।
उन्हें राहत देने की जगह विभाग उनका एकमात्र सहारा भी छिनने जा रहा है। अब सभी पेंशन धारकों को समाज कल्याण विभाग में आधार कार्ड देना होगा लेकिन ऐसे लोग अपना आधार कार्ड बनवाने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में यह विभाग में आधार कार्ड दे नहीं पाएंगे।
समाज कल्याण विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार जिन वृद्ध और विकलांग पेंशन धारकों ने 31 मार्च तक आधार कार्ड लिंक नहीं कराया, उनकी पेंशन रोक दी जाएगी। यह खबर मिलते ही ऐसे चलने फिरने में असमर्थ बुजुर्गों और दिव्यांगों के नाते-रिश्तेदार संबंधित विभाग में पहुंच रहे हैं।
लोग एक ही सवाल कर रहे हैं कि जिनके आधार कार्ड नहीं बन सकते, वे क्या करें? कई ऐसे लोग हैं, जिनकी उंगलियां नहीं हैं तो कुछ ऐसे भी हैं जिनके हाथ नहीं हैं। कई कुष्ठ रोगी हैं। बिना फिंगर प्रिंट के इनके आधार कार्ड कैसे बनेंगे? कई बुजुर्ग इतने बीमार हैं कि बिस्तर पर लेटे रहते हैं।
मिले छूट या पहुंचें घर तक
वरिष्ठ नागरिक परिषद के सामने भी यह समस्या आ चुकी है। यही वजह है कि परिषद के उपाध्यक्ष टीकाराम पांडे समाज कल्याण विभाग पहुंचे। उन्होंने इसका हल निकालने की बात कही। टीका राम ने कहा कि असमर्थ लोगों को आधार कार्ड के संबंध में छूट दी जाए या फिर ऐसे लोगों के घर जाकर टीम आधार कार्ड बनाए।
दे रहे छूट
जिला समाज कल्याण अधिकारी अनुराग शंखधर ने बताया कि प्रयास किया जा रहा है कि अधिक से अधिक पेंशन धारकों का आधार कार्ड लिंक हो जाए। हालांकि जो लोग असमर्थ हैं, उन्हें छूट दी जाएगी। उन्होंने कहा कि लोग परेशान न हों, किसी भी सूरत में उनकी पेंशन बंद नहीं होने दी जाएगी।