हाइकोर्ट ने छह हजार अतिथि शिक्षकों के मामले में राज्य के माध्यमिक शिक्षा निदेशक को एलटी व प्रवक्ता पदों की रिक्तियों के सापेक्ष हुई नियुक्तियों से संबंधित सभी दस्तावेजों के साथ कोर्ट में सात अप्रैल को उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। ललित मोहन व अन्य ने हाइकोर्ट में स्पेशल अपील दायर कर 10 अगस्त, 2016 के एकलपीठ के आदेश को चुनौती दी थी। एकलपीठ ने राज्य के विद्यालयों में एलटी व प्रवक्ता के रिक्त पदों में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति के राज्य सरकार के शासनादेश को निरस्त किया था।
एकलपीठ ने साथ ही यह छूट दी थी कि वह 31 मार्च 2017 तक पद पर बने रहेंगे। याचिका में कहा गया कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के पद रिक्त होने के कारण सरकार को अतिथि शिक्षकों की जरूरत है। पूर्व में हल्द्वानी निवासी आलोक परमार व अन्य ने भी एक अन्य याचिका एकलपीठ के समक्ष दायर कर कहा था कि सरकार ने 25 मई, 2016 को अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति के लिए शासनादेश जारी किया था, जो पूरी तरह गलत है।
अतिथि शिक्षकों का ब्लाक स्तर पर चयन हुआ, लेकिन नए शासनादेश के अनुसार इन्हें ब्लाक के अलावा जिला स्तर तथा मंडल स्तर पर समायोजित किया जा रहा है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाइकोर्ट की खंडपीठ ने सात अप्रैल की तिथि नियत करते हुए राज्य के माध्यमिक शिक्षा निदेशक को नियुक्तियों से संबंधित सभी दस्तावेजों के साथ कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए।