डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर एलपीजी (डीबीटीएल) योजना के तहत फॉर्म भरने के लिए रविवार को भी गैस एजेंसियां खुली रहेंगी।
चूंकि यह फॉर्म 31 दिसंबर तक ही जमा किया जाना है, इस वजह से व्यवस्था की गई है कि सभी गैस एजेंसियां अपने साप्ताहिक अवकाश वाले दिन भी खुली रहेंगी। अधिकतर गैस एजेंसियां रविवार को बंद रहती हैं, ऐसे में गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ने निर्णय लिया है कि यह एजेंसियां रविवार को भी खुली रहेंगी।
हालांकि, छुट्टी वाले दिन एजेंसियों में केवल फॉर्म ही जमा किया जाएगा। सिलेंडर की आपूर्ति या गैस कनेक्शन नहीं दिया जाएगा। वहीं, डीबीटीएल फॉर्म भरने के लिए शनिवार को भी गैस एजेंसियों में भीड़ रही। कई एजेंसियों में कर्मचारियों के धीमी गति से काम करने की वजह से लोगों की नोकझोंक भी हुई।
कई एजेंसियों में फॉर्म लेने के लिए लोग लंबी कतार में लगे रहे, जबकि कई जगह स्टाफ कम रहने की शिकायत रही। डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के अनुसार रविवार को भी शहर में कई एजेंसियां खुली रहेंगी, हालांकि सरकारी एजेंसियों में अवकाश रह सकता है।
अंग्रेजी में फॉर्म बना मुसीबत
गैस सब्सिडी के लिए भरा जाने वाला फॉर्म अंग्रेजी में प्रकाशित होने की वजह से कई लोगों को इसे समझना मुश्किल हो रहा है। शनिवार को भी गैस एजेंसियों पर बुजुर्ग और निरक्षर लोग फॉर्म भरने के लिए भटकते रहे। दूसरे लोगों की मदद से उन्होंने फार्म भरा। ऐसे लोगों की मदद के लिए गैस एजेंसियों के पास कोई व्यवस्था भी नहीं है।
हिंदी फॉर्म मिलने में देरी
तेल कंपनियों के अधिकारियों का दावा है कि पूरे प्रदेश के लिए करीब ढाई लाख फॉर्म हिंदी में छपवाए जा रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि अगले सप्ताह तक हिंदी वाले फॉर्म गैस एजेंसियों पर उपलब्ध हो जाएंगे। लेकिन वह कोई निश्चित तारीख नहीं बता रहे हैं। इससे आशंका यही है कि लोगों को 15 दिसंबर से पहले हिंदी वाले फॉर्म मिलने मुश्किल हैं।
डाटा फीडिंग में लग रहा वक्त
डिस्ट्रीब्यूटर्स की मानें तो गैस एजेंसियों में लंच टाइम से पहले आधा वक्त फॉर्म वितरण और इसके बाद फॉर्म जमा करने में लगाया जा रहा है। लंच के बाद कर्मचारी जमा हुए फॉर्म को आनलाइन कर रहे हैं, लेकिन डाटा फीडिंग की लंबी प्रक्रिया के चलते इसमें समय लग रहा है। इससे एक दिन में कुछ ही उपभोक्ताओं का काम पूरा हो पा रहा है।
बैंक से नहीं मिल रही मदद
गैस एजेंसी संचालकों का आरोप है कि बैंक वाले सहयोग नहीं कर रहे हैं। संचालकों ने आरोप लगाया कि एजेंसी से भरे फॉर्म लेने से बैंक मना कर रहे हैं। तरह-तरह की गलतियां बताई जा रही हैं, जिससे गैस कनेक्शन से जुड़ी सभी जानकारियां अपडेट नहीं हो पा रही हैं।
बैंककर्मियों के दिलचस्पी नहीं लेने के कारण फॉर्म तय समय पर जमा नहीं हो पा रहे हैं। अधिकतर गैस एजेंसियों में स्टाफ की कमी नहीं है। लेकिन पूरी प्रक्रिया में समय लगता है।
- चमनलाल, अध्यक्ष, दून एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन