पीडीएफ नेता, पर्यटन मंत्री दिनेश धनै वैसे तो सरकार और सीएम हरीश रावत के पक्ष में लामबंद नजर आते हैं, पर जब बात कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की आती है तो उनकी त्योरियां चढ़ जाती हैं।
विज्ञापन
बगैर किसी का नाम लिए वह कहते हैं कि कांग्रेस के कुछ नेता गिरगिट की तरह रंग बदलने में माहिर हैं। ये नेता तो यह मानने लगे हैं कि इनके बिना पार्टी का वजूद तक खतरे में पड़ जाएगा। चुनावी समर में उतरने के सवाल पर वह ताल ठोककर कहते हैं कि ‘चुनाव तो टिहरी से ही लड़ूंगा, पार्टी कांग्रेस हो या निर्दलीय’। धनै इतने पर नहीं रुके उन्होंने तो यहां तक कहां कि कांग्रेस के कुछ नेता उन्हें ‘सौतन’ तक मानने लगे हैं, पर उन्हें इसकी परवाह नहीं है।
पीडीएफ और कांग्रेस के बीच उभरे विवाद को बकवास करार देते हुए उनका कहना है कि यह कुछ लोगों की खीझ है, जिसे ये लोग गाहे-बगाहे मीडिया के जरिये सामने लाते हैं। बकौल धनै ‘यदि किसी को भी पीडीएफ का साथ नागवार गुजर रहा है तो वह साथ छोड़ दें।’ अमर उजाला सीनियर रिपोर्टर अरविंद सिंह ने इन्हीं सब मुद्दों को लेकर पर्यटन मंत्री दिनेश धनै से कुछ तीखे सवाल किए। धनै जिस अंदाज में नजर आए आप भी देखिए-
विज्ञापन
-पिछले कुछ महीनों से पीडीएफ - कांग्रेस के बीच तकरार जारी है। विधानसभा चुनाव से पहले ऐसी तकरार के क्या राजनीतिक मायने हैं?
..देखिए, पीडीएफ ने प्रदेश स्तरीय कांग्रेसी नेताओं से तो कोई राजनीतिक समझौता नहीं किया है। हमारी बात केंद्रीय आलाकमान सोनिया गांधी और मुख्यमंत्री हरीश रावत से हुई है। हम राष्ट्रीय नेताओं को जानते हैं। प्रदेश स्तरीय नेता क्या बयानबाजी कर रहे हैं, मैं इसकी परवाह नहीं करता। प्रदेश स्तरीय नेताओं को तो कुछ बोलना ही नहीं चाहिए। यदि किसी को पीडीएफ - कांग्रेस का गठबंधन नागवार है तो खुलेआम कह रहा हूं साथ छोड़ दे। औकात समझ में आ जाएगी।
किशोर उपाध्याय
- फोटो : अमर उजाला
-किशोर उपाध्याय से जिस तरह से आपकी सियासी अदावत है क्या इसका नुकसान कांग्रेस पार्टी या आपको विधानसभा चुनाव में नही होगा?
..मैने कहा न, कि मै सोनिया गांधी, राहुल गांधी, गुलाब नबी आजाद, अहमद पटेल जैसे केंद्रीय नेताओं के अलावा सिर्फ मुख्यमंत्री हरीश रावत को जानता हूं। बाकी किसी नेता को नहीं जानता । प्रदेश स्तरीय नेता क्या टिप्पणी कर रहे हैं मैं इसकी परवाह नहीं करता। मै प्रदेश की जनता के हित की बातों को सोचता हूं। प्रदेश की जनता मेरे लिए सर्वोपरि है।
-पीडीएफ - कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के बीच उपजे विवाद को सुलझाने में मुख्यमंत्री रावत नाकाम रहे या फिर उन्होंने कोशिश ही नहीं की?
देखिए पीडीएफ - कांग्रेस के बीच कोई विवाद नहीं है। कुछ लोगों के निहित स्वार्थ हैं और यही लोग हैं जो पीडीएफ को लेकर अनाप-शनाप बयानबाजी करते रहते हैं। जहां तक मुख्यमंत्री का सवाल है तो पीडीएफ का सरकार से कोई विवाद ही नहीं है। कांग्रेस के कुछ नेता गिरगिट की तरह रंग बदल रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यह वही नेता है जिन्होंने सरकार को समर्थन देने पर एक नहीं दो दो फूल थमाकर स्वागत किया था। अब आज बयानबाजी कर रहे हैं। (आप समझ गए होंगे, इशारा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की तरफ था। )
-यदि कांग्रेस ने टिहरी में प्रत्याशी उतार दिया तब क्या होगा?
..सवाल ही नहीं उठता। मेरी कांग्रेस आलाकमान से बात हुई है। आलाकमान ने साफ शब्दों में मुझे आश्वासन दिया है कि यदि कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं तो स्वागत है। यदि किसी कारणवश निर्दलीय तो पार्टी प्रत्याशी नहीं उतारेगी। पार्टी आलाकमान को अपने वायदे पर कायम रहना चाहिए।
-कांग्रेस ने पीडीएफ मंत्रियों पर पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा, अपमान का आरोप लगाया है ?
..देखिए, पीडीएफ ने सरकार का पूरे कार्यकाल साथ दिया। पीडीएफ की ही बदौलत कांग्रेस के कई पदाधिकारी-कार्यकर्ता कोआपरेटिव बैंक में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे। पीडीएफ की बदौलत ही कांग्रेस ने राज्यसभा सीट जीती। दर्जनों पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं को लालबत्ती मिली। क्या यह पीडीएफ की ओर से कांग्रेसी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं का अपमान है अगर है तो यह अपमान मैने किया है।
-पर्यटन मंत्री और जीएमवीएम में अध्यक्ष दोनों पद एक साथ क्यों?
..देखिए जीएमवीएन अध्यक्ष के तौर पर तमाम मुद्दों को सुगमता से उठाने में मदद मिलती है। विभागीय कार्यो को निपटाने में मदद मिलने के साथ ही पर्यटन योजनाओं को तेजी से लागू कराने में मदद मिलती है।
-राज्य में पर्यटन की अपार संभावनाएं है, लेकिन बतौर पर्यटन मंत्री उस मुकाम को नही हासिल कर पाएं जिसकी उम्मीद थी?
..ऐसा नही है। पर्यटन के क्षेत्र में राज्य में बहुत कार्य कराए गए हैं। राज्य देश ही नहीं दुनिया में नए पर्यटन केंद्र के रूप में उभरा है। केदारनाथ आपदा के बाद चारधाम यात्रा बड़ी चुनौती थी, लेकिन सरकार और मैने यात्रा को सकुशल संपन्न कराया। तमाम देशी विदेशी कंपनियां राज्य में पूंजी निवेश को राजी है। आने वाले समय में आपको पर्यटन के क्षेत्र में बहुत कुछ देखने को मिलेगा।
-आरोप है कि टिहरी झील विकास प्राधिकरण समेत अन्य संस्थाओं में चहेतों और स्थानीय लोगों को नौकरी दी ?
..आरोप निराधार है। टिहरी झील विकास प्राधिकरण समेत तमाम संस्थाओं को सभी युवाओं को बराबर का मौका दिया गया। किसी भी प्रकार की जांच करायी जा सकती है।
-क्या पीडीएफ भविष्य में कांग्रेस को छोड़ भाजपा के साथ भी राजनीतिक गठबंधन कर सकता है?
..देखिए, राजनीति में सब कुछ देश, काल और परिस्थिति के साथ बदलता रहता है। भाजपा ही नहीं बसपा और सपा जैसी सभी राजनीतिक पार्टियों से गठबंधन हो सकता है। यह सब कुछ परिस्थिति पर निर्भर करेगा। बहरहाल अभी पीडीएफ कांग्रेस के साथ है। यही सत्य है।