साईं अस्पताल के डॉ. संजय कुमार ने बताया कि शनिवार को उनके पास दो लोग नरेंद्र को लेकर गंभीर अवस्था में आए थे। भर्ती कराने वालों ने खुद को भाई-बहन बताया था। मरीज डायबिटीज के साथ सीवियर सेफ्टीशॉक से पीड़ित था। दस हजार रुपये जमा करने के बाद इलाज शुरू हुआ। जांच से पता चला कि किडनी में संक्रमण है।
अधिक देर करने पर जहर शरीर में फैल सकता था। काफी विचार करने के बाद बाईं तरफ की एक किडनी निकाली गई। ऑपरेशन से पहले परिजनों को फोन किया गया था लेकिन वे नहीं आए।
किडनी निकालने के बाद उसे चंदन डायग्नोसिस्ट सेंटर में बायोप्सी टेस्ट के लिए भेजा गया है। अस्पताल के प्रबंध निदेशक मोहन सती ने दावा किया कि इलाज मेें किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई।
पत्नी ने उठाए भर्ती कराने वाली महिला पर सवाल
नरेंद्र सिंह की पत्नी दीपा रावत ने पति को भर्ती कराने वाली महिला सतेश्वरी की भूमिका पर संदेह जताया है। आरोप लगाया कि सतेश्वरी नरेंद्र सिंह की बहन नहीं है। उसने फर्जी बहन बनकर दस्तखत किए हैं। दीपा ने कहा कि वह अस्पताल में रविवार को आईं थी।
बताया गया कि उसके पति की आंख का ऑपरेशन है। इस मामले में जांच कर कार्रवाई होनी चाहिए। इधर, मुखानी थानाध्यक्ष नंदन सिंह रावत का कहना है कि रजिस्टर में नरेंद्र की पत्नी दीपा ने दस्तखत किए हैं। आरोपों की जांच की जाएगी। प्रथमदृष्टया अस्पताल में अब तक कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई है।