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खाकी के ‘मिशन आक्रोश’ पर नौकरशाह और पुलिस कनफ्यूज

Sun, 23 Aug 2015 12:05 PM IST
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में पुलिस कर्मचारियों के मिशन आक्रोश पर मुख्य सचिव राकेश शर्मा के बयान ‘न एरियर और न एक्शन’ के बीच पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू के 31 दिसंबर तक का अल्टीमेटम नए विवाद को जन्म देने वाला है।
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सरकार और पुलिस मुख्यालय के परस्पर विरोधी बयान से यही जाहिर होता है कि इस मुद्दे पर एक राय नहीं है। ऐसे में प्रदेश के दोनों बड़े नौकरशाह का संदेश कितना कारगर होगा, यह देखने वाली बात होगी। पुलिस कर्मचारियों का मिशन आक्रोश सरकार के गले की फांस बनता जा रहा है।

वेतन विसंगति पर काली पट्टी बांधकर विरोध कर प्रदेश के पुलिस कर्मियों ने नई परिपाटी को जन्म दिया है। हर स्तर से पुलिस कर्मियों का विरोध थामने की कोशिश हो रही है, लेकिन पुलिस को अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाले खुद अलग-अलग राग अलाप रहे हैं।
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मुख्य सचिव राकेश शर्मा सरकार की तरफ से बयान देते है कि पुलिस कर्मचारियों को एरियर का भुगतान नहीं मिलेगा और न ही किसी पर कार्रवाई होगी। चार दिन बाद डीजीपी कहते हैं कि उनकी मांग पूरी करने के लिए वह कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे।

कोर्ट तक उनकी लड़ाई को लड़ा जाएगा। 31 दिसंबर तक डेट तय करने को क्या अप्रत्यक्ष रुप से धमकी माना जाए। सरकार की फजीहत पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पुलिस कर्मियों को उकसाने पर भाजपा को निशाना तो बनाया, लेकिन पुलिस कर्र्मचारियों के मुद्दे पर कुछ भी बोलने से परहेज किया।

इन सब के बीच 31 अगस्त को पुलिस कर्मियों के परिजनों द्वारा परेड ग्राउंड की तरफ कूच करने की चर्चाओं पर अभी विराम नहीं लग पाया है। अब यह देखना दिलचस्प रहेगा कि पुलिस का मिशन आक्रोश क्या-क्या गुल खिलाता है।

क्या बोले थे मुख्य सचिव
19 अगस्त को प्रदेश के मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू की मौजूदगी में कहा था कि रिवाइज ग्रेड के आधार पर एरियर देना संभव नहीं है। साथ ही स्पष्ट किया था कि किसी पुलिस कर्मी के खिलाफ कार्रवाई का कोई इरादा नहीं है।

डीजीपी का ताजा बयान
पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने मुख्य सचिव के बयान के चार बाद पुलिस संबोधन में कहा कि वह वेतन विसंगति को लेकर नया प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज रहे हैं। यदि वह उनकी जायज मांगों को 31 दिसंबर तक नहीं करा पाए तो वह अपनी चूक मानकर डीजीपी की कुर्सी छोड़ देंगे।

कार्रवाई पर आईजी का यह बयान
पुलिस महानिरीक्षक संजय गुंज्याल ने मुख्य सचिव के कार्रवाई न करने के बयान के बाद 21 अगस्त को हरिद्वार में कहा कि यह तरीका गलत है। खासतौर से पुलिस महकमे में यह सब चलने वाला नहीं है। इस तरह के पुलिस वालों को चिह्नित कर बर्खास्त करेंगे और वह जेल भी जाएंगे।
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