'जेनेरिक दवाओं का ठीक तरह से नहीं मिलना स्वास्थ्य विभाग के लिए निंदनीय और शर्मनाक है।' दून चिकित्सालय में जेनेरिक दवाओं की कमी पर चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के महानिदेशक डॉ. आरपी भट्ट ने दून चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्साधीक्षक डॉ. आरएस असवाल को लिखे पत्र में यह तल्ख टिप्पणी की है।
डॉ. भट्ट ने मामले में प्रमुख चिकित्साधीक्षक से सात जनवरी शाम चार बजे तक हर हाल में रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं।
अमर उजाला ने छह जनवरी के अंक में दून चिकित्सालय में जेनेरिक दवाओं की कमी की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। मामले में चिकित्सा-स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. आरपी भट्ट ने तमाम जानकारी हासिल करने की बाबत प्रमुख चिकित्साधीक्षक डॉ. आरएस असवाल को सख्त चिट्ठी लिखी है। उन्होंने डॉ. असवाल के रवैये पर घोर आपत्ति प्रकट की है।
डॉ. भट्ट लिखते हैं कि दून चिकित्सालय की जेनेरिक शॉप में दवाओं की उपलब्धता महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण उत्तराखंड के द्वारा नहीं की जाती है। इस काउंटर का समस्त प्रबंधन व वित्तीय नियंत्रण दून चिकित्सालय द्वारा चिकित्सा प्रबंधन समिति के अनुमोदन पर स्वयं सुनिश्चित किया जाता है।
बुधवार शाम चार बजे तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
डॉ. भट्ट ने प्रमुख चिकित्सक को लिखा है कि उनको कुल दवाओं के लिए प्रावधानित बजट की 30 प्रतिशत धनराशि दवाओं के क्रय के लिए इस वित्तीय वर्ष में निर्गत की गई है। उसके सापेक्ष उन्होंने तय तिथि तक कौन कौन सी दवा निविदा द्वारा क्रय की है, उसकी संपूर्ण सूची प्रस्तुत करें।
डॉ. भट्ट ने प्रमुख चिकित्सक को निर्देश दिए हैं कि अगर इस वित्तीय वर्ष में कोई निविदा प्रकाशित नहीं की गई है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है? इसकी भी सुस्पष्ट आख्या प्रस्तुत करें। पत्र में लिखा गया है कि दून चिकित्सालय की चिकित्सा प्रबंधन समिति में भी दवाओं को क्रय किए जाने का प्रावधान है।
चिकित्सा प्रबंधन समिति से निर्गत की जाने वाली धनराशि सामान्य वार्षिक बजट के अतिरिक्त भी उनके पास उपलब्ध है। इसके सापेक्ष की गई निविदा एवं क्रय की गई दवाइयों का विवरण भी प्रस्तुत करें। लिखा है कि यदि दवायें क्रय नहीं की गई हैं तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
निदेशक भंडार स्वास्थ्य को भी दिए कड़े आदेश
डीजी हेल्थ डॉ. आरपी भट्ट ने निदेशक भंडार स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय को भी कड़ा पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने आदेश दिया है कि सात जनवरी शाम चार बजे तक वह अवगत कराएं कि किस कि दवा के लिए कौन-कौन निविदा किस स्तर पर लंबित एवं प्रक्रियाधीन है। उन्होंने यह भी लिखा है कौन-कौन सी दवाएं प्राप्त की जा सकती हैं। निर्देश दिए हैं कि वह व्यक्तिगत रूप से दून चिकित्सालय का भ्रमण कर दवाओं की उपलब्धता एवं उनके द्वारा की गई निविदा के संदर्भ में स्पष्ट रिपोर्ट दें।
नि:शुल्क जेनेरिक दवाओं के लिए शासन ने दिए 15 करोड़
नि:शुल्क जेनेरिक दवाओं के लिए शासन ने महानिदेशालय को पंद्रह करोड़ रुपये दिए हैं। यह नेशनल हेल्थ मिशन का फंड है जो प्रदेश को मिला है। इसके तहत गरीब मरीजों को मुफ्त जेनेरिक दवाएं मिलनी हैं। जल्द ही जरूरतमंदों को नि:शुल्क जेनेरिक दवाएं उपलब्ध होंगी। इससे बड़ी संख्या में लोगों को फायदा मिलेगा। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा ओमप्रकाश ने बताया कि यह योजना नि:शुल्क जेनेरिक दवाइयों के लिए है। इससे प्रदेश लाखों गरीबों को लाभ मिलेगा।