देहरादून। व्यक्ति को अपनी दुर्बलताओं पर अधिक विचार नहीं करना चाहिए। साथ ही अपने गुणों का अहंकार करने से भी बचना चाहिए। यह बात आचार्य शिवप्रसाद ममगाई ने अनारवाला में चल रही शिवपुराण कथा में प्रवचन के दौरान कही।
आचार्य ममगाई ने कहा कि दुर्बलताओं का ज्यादा विचार करने से हीन भावना आती है। वहीं सत्कर्मों का बखान करने से अहंकार उत्पन्न होता है। उन्होंने कहा कि लौकिक और पारलौकिक उन्नति ही वास्तविक धर्म है। आत्मिक और पारमार्थिक उन्नति भौतिक प्रगति से अधिक आवश्यक है। जीव की अपनी कोई सामर्थ्य नहीं होती। मानव जीवन में जो कुछ भी प्राप्त होता है, वह सब प्रभु की कृपा का प्रसाद है। इस दौरान नलिन प्रधान, आचार्य पुष्कर कैंथोला, विजय थापा, कुसुम नेगी, निर्मला गुसाईं, सुनीता डंडरियाल, अरुण गुरुंग, कल्पना चौहान, राहुल सती, अंकित भट्ट उपस्थित रहे।