आगामी माह से उत्तराखंड की चारधाम गंगोत्री-यमुनोत्री और बदरीनाथ-केदारनाथ यात्रा शुरू होने वाली है।
धामों के कपाट खुलने के दौरान देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों को यात्रा रूटों पर हिमखंड दिखाई देते थे, लेकिन इस बार पहली बार ऐसा होगा कि चारों धामों के रूटों पर तीर्थयात्रियों को हिमखंड नहीं दिखाई देंगे। जानकार इसे बर्फबारी के समय में परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग का कारण मान रहे हैं।
छह स्थानों पर पसरे रहते थे 25-45 फीट ऊंचे हिमखंड
आगामी तीन मई को केदारनाथ धाम के कपाट खुल रहे हैं, लेकिन इस बार धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को पैदल मार्ग पर हिमखंड नजर नहीं आएंगे। इस सीजन कम बर्फबारी से लिनचोली से रुद्रा प्वाइंट के बीच एकमात्र हिमखंड है, जो तेजी से पिघल रहा है। जबकि बीते दो वर्षों में मई तक रास्ते में पांच, छह स्थानों पर 25 से 45 फीट ऊंचे हिमखंड पसरे हुए थे। बीते वर्ष नवंबर-दिसंबर से लेकर इस वर्ष फरवरी तक सीमित बारिश व बर्फबारी का प्रकोप केदारनाथ व पैदल मार्ग पर साफ दिखाई दे रहा है।
रामबाड़ा, टास्क फोर्स चट्टी, निम हेलीपैड, छानी कैंप के समीप इस बार हिमखंड का नामों निशान तक नहीं है, जबकि वर्ष 2015-16 में इन स्थानों पर हिमखंड रास्ते तक पसरे हुए थे। जो जून तक भी काफी हद तक बने रहे। इस बार सिर्फ भैरव गदेरे के समीप हिमखंड नजर आ रहा है, जो बीते वर्षों की तुलना में काफी कम है। हैरानी की बात यह है कि रामबाड़ा से भैरव गदेरे के ऊपरी तरफ घने जंगलों में भी लकदक बर्फ नहीं है। आपदा के बाद से केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्य कर रहे नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के कैप्टन सोबन सिंह बिष्ट और हवलदार देवेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि इस बार बर्फ कम जम रही है।
बर्फबारी के समय में परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमखंडों पर भी असर पड़ रहा है। इस बार बदरी-केदार क्षेत्र में सीमित बर्फबारी के कारण ग्लेशियर नहीं बनना और बर्फ के गिरते ही कुछ ही घंटों में पिघलना भी इसी का परिणाम है।
- डा. महावीर सिंह नेगी, एसोसिएट प्रोफेसर भूगोल, एचएनबीके विवि श्रीनगर गढ़वाल