एक दौर में संजीव कुमार के जोड़ीदार और गुलजार साहब की खास पसंद समझे जाने वाले देवेन वर्मा को सरोवर नगरी नैनीताल की खूबसूरती भा गई थी।
देवेन की मुराद पूरी न हो सकी
लेकिन 60 के दशक में शूटिंग के दौरान नैनीताल के कुदरती नजारों की जो तस्वीर उनके मन में बसी, वह हमेशा उसे तलाशते रहे। हालांकि, गाड़ियों की लगातार बढ़ती भीड़ और मकानों के उगते जंगलों के चलते उनकी यह मुराद पूरी न हो सकी।
मशहूर फिल्म अभिनेता, निर्देशक देवेन वर्मा का निधन हो गया। फिल्म विशेषज्ञ मनोज पंजानी बताते हैं कि देवेन बड़े कलाकार थे, लेकिन उनके स्वभाव में कभी इसका कोई अहं नजर नहीं आया।
मनोज बताते हैं कि वर्ष 1963 में बीआर चोपड़ा की फिल्म गुमराह की शूटिंग के लिए देवेन नैनीताल आए थे, तब उन्हें नैनीताल की खूबसूरती बेहद भायी थी।
बताते हैं कि कई साल बाद यश चोपड़ा के साथ मुंबई में देवेन से मुलाकात हुई तो वह नैनीताल की यादों में खो गए। मनोज के मुताबिक उन्होंने देवेन को फिर नैनीताल आने का न्योता दिया तो देवेन बोले, सुना है अब नैनीताल में भीड़ बहुत बढ़ गई है।
गाड़ियों का धुआं और हॉर्नों का शोर वहां भी चैन नहीं लेने देता। बेतहाशा कंक्रीट उग रही है। चिंता जताते हुए देवेन ने कहा कि कुदरत के तोहफों की सुरक्षा करना जरूरी है। इसके बाद बोले, ‘मेरे मन में तो वही नैनीताल बसा है। तुम 1963 का नैनीताल लौटा सको तो मैं जरूर देखने आऊंगा।’
ये तो जानते ही होंगे
मनोज बताते हैं कि यश चोपड़ा ने उन्हें यह कहकर देवेन वर्मा से मिलवाया कि पंजानी ने उर्दू के शायर और हिंदी लेखक अख्तर उल ईमान पर डॉक्यूमेंट्री बनाई है।
यह सुनकर देवेन बहुत खुश हुए और पंजानी से बोले फिर तो तुम्हें यह भी पता होगा कि अख्तर साहब ने मेरी निर्देशित दो फिल्मों नादान और बड़ा कबूतर की कहानी लिखी है।