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श्रीमद्भगवत: देहरादून में आज से देवकीनंदन ठाकुर महाराज की कथा शुरू,  दो अप्रैल को झांकी के साथ होगा समापन

Fri, 27 Mar 2026 01:51 PM IST
Renu Saklani माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून

सार

देहरादून में आज से देवकीनंदन ठाकुर महाराज  कथा सुनाएंगे। दो अप्रैल को झांकी के साथ कथा का समापन होगा।
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देवकीनंदन ठाकुर महाराज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रेंजर्स ग्राउंड में विश्व शांति सेवा समिति की ओर से श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने पहले दिन कथा की महत्वता बताने के साथ ही अपनी परंपरा और संस्कृति बचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान ही सनातन की जड़ है। हम और हमारे बच्चे सनातन के पत्ते हैं। जड़े मजबूत नहीं होगी तो पत्ते सुरक्षित नहीं हो सकते। जड़ों से जुड़ना बेहद जरुरी है।

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शुक्रवार को श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई। भव्य सजे पंडाल में पहले दिन कथा सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पहले दिन कैबिनेट मंत्री खजानदास भी कथा में पहुंचे। कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने कहा कि संतान कोई शुभ काम करती हैं तो उसकी प्रसन्नता उनके पित्रों को होती है। जिस दून में आप बैठें है वो साधारण नहीं है। द्रोणाचार्य ने यहां तप किया था। दून में रहने वाला हर व्यक्ति अध्यात्म से जुड़ा है। जिन शहरों में बाहर से बच्चे पढ़ने आ रहे हैं, वहां थोड़ा बदलाव नजर आता जा रहा है। हमे उसे बचाना है। जो भागवत में नहीं है वो ब्रह्मांड में कही नहीं है।

उन्होंने कहा कि रामनवमी का पर्व शोभायात्रा तक सीमित नहीं है। आज के दिन संकल्प लें कि आज से नौ या 18 दिन तक अपने बच्चों को भगवान राम की कहानी सुनाए, उनके बारे में बताए। कलयुग के लोगों के कल्याण के लिए श्रीमद्भागवत कथा ही एकमात्र उपाय है। इस अवसर पर मुख्य यजमान संदीप रस्तोगी, सुनील शर्मा आदि मौजूद रहे।
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11 साल बाद देहरादून आए देवकीनंदन ठाकुर
प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर महाराज 11 साल बाद देहरादून आए हैं। 11 साल पहले वह देहरादून आए थे, उस समय भी उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा सुनाई थी। कथा के पहले दिन उन्होंने सबसे पहले इसी बात का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 11 साल बाद देहरादून वासियों से मुलाकात हुई है।
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युद्ध जल्द बंद नहीं हुआ तो होने वाली है बड़ी किल्लत: देवकीनंदन
उन्होंने ईरान और इसराइल युद्ध पर बोलते हुए कहा कि ये प्रकृति लड़ रही है। ये साधारण युद्ध नहीं है। जल्द युद्ध बंद नहीं हुआ तो इससे बड़ी किल्लत होने वाली है। इससे सावधानी बेहद जरुरी है। उन्होंने कहा कि जब अनीति बढ़ जाती है, व्यक्ति किसी और के बारे में सोचता तक नहीं है, तब प्रकृति उन्हें मिटाने की तैयारी कर लेती है। जो प्रकृति अनितिकारों को मिटाएगी, वहीं धर्म के पथ पर चलने वालों को बचा भी लेगी।

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