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अब घर की उलझनें सुलझा रही ‘जासूस’ एजेंसियां

Fri, 13 Nov 2015 03:14 PM IST
चांद मोहम्मद/ अमर उजाला, देहरादून
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पति-पत्नी का चाल-चलन, शादी से पहले दूल्हा-दुल्हन का चरित्र, उसके वास्तविक कारोबार, नौकरी, तनख्वाह और अपनी संतान की संगति जानने के लिए देहरादून के लोग जासूसी एजेंसियों की मदद लेने लगे हैं।
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यही वजह है कि शहर में जासूसी एजेंसियों की संख्या बढ़ती जा रही है। निजी जासूसी एजेंसियां चोरी, लूट, डकैती, हत्या, धोखाधड़ी आदि आपराधिक मामलों में फोरेंसिक जांच करने का भी दावा करती हैं। हालांकि, पुलिस अधिकारी इस बात से इनकार करते हैं।

एक निजी डिटेक्टिव एजेंसी में फोरेंसिक हेड अभिषेक वशिष्ठ का कहना है कि उनके पास एकल परिवारों से संबंधित मामले अधिक आते हैं। उनका कहना है कि भागदौड़ भरी जिंदगी में परिवार को समय नहीं दे पाना आम बात हो गई है। ऐसे में परिवार के सदस्यों को नहीं समझ पाना समस्या बनती जा रही है।
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यही नहीं, बच्चे भी पढ़ाई और नौकरी के सिलसिले में मां-बाप से दूर रहते हैं। ऐसे में उनकी संगत किससे है और वह क्या कर रहे हैं? इसे समझ पाना माता-पिता के लिए मुश्किल हो जाता है। शादी के वक्त लड़के या लड़की के बारे में पूरी जानकारी हासिल करना भी मुश्किल हो गया है।

ऐसे में लोग शादी से पहले लड़के या लड़की के बारे में पूरी हकीकत जानने के लिए प्राइवेट जासूसी एजेंसियों की मदद ले रहे हैं। वशिष्ठ का कहना है कि निजी जासूसी एजेंसियों का मकसद परिवारों, कारोबारियों या आपराधिक मामलों में दखल देना नहीं बल्कि उनका समाधान करना है।

उन्होंने बताया कि किसी भी डिटेक्ट करने से पहले उनकी एजेंसी संबंधित क्षेत्र के पुलिस अधिकारी को अवगत कराती है। डिटेक्ट करने वाले कर्मचारी को कोर्ट में गवाही देने का अधिकार भी होता है।

केस के हिसाब से पैसा
जासूस एजेंसी क्लाइंट से केस के हिसाब से चार्ज लेती है। छोटे केस का चार्ज हजारों और बड़े मामलों का चार्ज लाखों में होता है।

मेरे कार्यकाल में अभी तक किसी निजी जासूसी एजेंसी ने मदद नहीं मांगी है और न ही मैंने इनसे कोई सहायता ली है। यदि कोई पंजीकृत एजेंसी मदद मांगेगी तो उसकी सहायता जरूर की जाएगी।
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- डॉ. सदानंद दाते, एसएसपी, देहरादून
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