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बेटे की खबर आने तक गांव नहीं लौटूंगा...

Fri, 26 Jul 2013 09:26 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
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आर्यनगर में 8×12 की एक छोटी सी कोठरी। फर्श पर बैठे दिनेश चंद्र पांडेय की आंखों से बेटे संतोष पांडेय का जिक्र करते ही आंसू छलक जाते हैं।
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बेहतरीन ड्राइवरों में शुमार किए जाने वाला महज 26 साल का हाईस्कूल पास संतोष मालिक की पार्टी को लेकर केदारनाथ गया था। लेकिन 16 जून को आई आपदा के बाद से उसका कुछ पता नहीं। प्रशासन ने लापता लोगों की सूची में संतोष का नाम शामिल किया है। अल्मोड़ा के एक छोटे से गांव अटी पुनौली, पोस्ट दन्या का रहने वाला संतोष यहां अपने दो छोटे भाईयों के साथ इसी कोठरी में रह रहा था।

वह आखिरी काल थी
एक भाई गिरीश ने 8वीं के बाद एक होटल में काम करना शुरू कर दिया था, जबकि उससे छोटा मनोज अभी एसजीआरआर में 11वीं में पढ़ रहा है। बीती 15 जून को संतोष की गिरीश से बात हुई थी। उसने केदारनाथ में होने का जिक्र करते हुए अपने सकुशल होने की सूचना दी थी, वह आखिरी काल थी। भाईयों ने 21 जून को पिता को गांव में रह रहे पिता दिनेश को संतोष की गुमशुदगी की खबर दी तो वह बेहद घबराए दून पहुंचे।
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संतोष की मां को भी गुमशुदगी की बाबत कुछ नहीं बताया। जहां-जहां जा सकते थे गंगोत्री, यमुनोत्री, उत्तरकाशी तक जाकर उसे तलाशा, लेकिन कुछ पता नहीं चला। स्थानीय पार्षद समेत नेताओं तक की परिक्रमा की, लेकिन अब तक कोई हाल अपने लाल का न जान सके। फिर भी दृढ़ हैं। कहते हैं-बेटे की खबर आने तक गांव नहीं लौटूंगा। खेती बर्बाद हो तो हो...।
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इसी सर्दी में शादी होनी थी
संतोष की शादी इसी सर्दी में तय थी। गांव से ही उसके लिए दुल्हन चुनी गई थी, लेकिन अब उसके लापता होने से हाहाकार है। दिनेश चंद्र पांडेय बताते हैं कि उसकी छोटी बहन के लिए भी लड़का तलाश रहे थे, लेकिन अब कुछ तब तक नहीं हो सकता, जब तक उसका पता नहीं चल जाता।
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