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पालिका प्रशासन की नाक के नीचे शहर में बेची जा रही पॉलीथिन

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विकासनगर मुख्य बाजार में पॉलीथिन लेकर सामान की खरीददारी जाते बुजुर्ग। - फोटो : VIKAS NAGAR
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विकासनगर। एक तरफ पालिका प्रशासन स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम के तहत जगह-जगह सफाई अभियान और रैली निकाल लोगों को पॉलिथीन के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने की बात कर रहा है। वहीं दूसरी ओर पालिका प्रशासन की नाक के नीचे शहर में पॉलीथिन खरीदी और बेची जा रही है। बावजूद इसके पालिका प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है। हर बार पालिका की कार्रवाई कुछ दुकानदारों के चालान काटने तक सीमित रह जाती है। पालिका की टीम के जाते ही शहर में फिर से पॉलीथिन बेची और खरीदी जानी शुरू हो जाती है। अगस्त 2018 में राज्य सरकार ने पॉलीथिन को पूरी तरह से बैन कर दिया था। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलिथीन का इस्तेमाल न करने की बात कर चुके हैं। रोजाना शहर से कई क्विंटल तक पॉलीथिन कचरे के रूप में बाहर निकलती हैै। जिसे खाकर न सिर्फ मवेशियों की हालत खराब होती बल्कि पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। स्थानीय निवासी गुड्डू नेगी, दीपू रावत, प्रमोद चौहान, हिमांशु सेमवाल आदि का कहना है कि पालिका प्रशासन की हीलाहवाली के कारण जगह-जगह पॉलिथीन के रूप में गंदगी बिखरी रहती है। आरोप लगाया कि पालिका प्रशासन और व्यापारियों की मिलीभगत के कारण ही अब तक पॉलिथीन पर रोक नहीं लग पाई है। शहर के कई दुकानों में पॉलीथिन में सामान खरीदा और बेचा जाता है। इसके साथ ही कई दुकानों में अब भी थर्माकॉल से बनी सामग्री भी बेची जा रही है। पालिका क्षेत्र के साथ ही ग्रामीण अंचलों में भी पॉलिथीन पर रोक नहीं लग पा रही है।
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अभी पालिका प्रशासन लोगों को खुद पॉलिथीन का इस्तेमाल न करने के लिए जागरूक रहा है। तीन अक्तूबर से व्यापक स्तर पर अभियान चला पॉलीथिन जब्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। पॉलिथीन बेचने वालों पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। भजन लाल आर्य, अधिशासी अधिकारी
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