छावनियों के निर्वाचित बोर्ड का कार्यकाल पूरा होने और रक्षा मंत्रालय से छह माह के कार्यकाल विस्तार की मिली स्वीकृति के बाद अब उपाध्यक्ष पद पर दोबारा चयन होगा।
कैंट एक्ट के तहत कार्यकाल बढ़ाने का प्रावधान सिर्फ निर्वाचित सभासदों के लिए हैं, जबकि उपाध्यक्ष के चुनाव का सीधा मतदान न होने से पद विशेष के लिए संशय बना हुआ था।
अब महानिदेशालय रक्षा संपदा ने कार्यकाल वृद्धि के तहत आई 58 छावनियों में मुख्य अधिशासी अधिकारियों को उपाध्यक्ष चयन प्रक्रिया करने के निर्देश दिए हैं।
62 से 58 छावनियों में निर्वाचित बोर्ड का जून में कार्यकाल पूरा होने के बाद सभी परिषदों में निर्वाचित सदस्यों को दिसंबर 2013 तक सेवा विस्तार दिया गया। जनगणना 2011 के आंकड़े प्राप्त न होने के चलते रक्षा संपदा महानिदेशालय ने सभासदों को छह माह का सेवा विस्तार दिया है।
ऐसी स्थिति में सभी सभासदों का कार्यकाल बढ़ गया, लेकिन उपाध्यक्ष निर्वाचित सदस्यों के बीच से चुने जाने के कारण इस पद को लेकर संशय है। सीईओ गढ़ी कैंट अरविंद द्विवेदी ने बताया कि डीजी कार्यालय से उपाध्यक्ष पद पर दोबारा चयन की औपचारिकता पूरी करने के निर्देश जारी किये गए हैं।
उपाध्यक्ष की होगी अग्निपरीक्षा
सभासदों के बहुमत से चुनकर बने उपाध्यक्षों को दोबारा अग्निपरीक्षा देनी होगी। कार्यकाल विस्तार का फायदा मिलने के बाद सभासद अब दोबारा उपाध्यक्ष का चयन करेंगे। इसके लिए सभासदों में वोटिंग या आपसी सहमति भी हो सकती है। चुने जाने वाले उपाध्यक्ष को इसके बाद छह माह कार्यकाल विस्तार का लाभ मिलेगा।
दोबारा बैठाने होंगे समीकरण
गढ़ी व क्लेमेंटटाउन कैंट में उपाध्यक्ष पद के लिए अब दोबारा खींचतान होगी। छह माह तक उपाध्यक्ष बनने के लिए दावेदार सभासदों से गठजोड़ करेंगे। ऐसे में उपाध्यक्ष की कुर्सी खिसकाने को लेकर भी विरोधी खेमे दांव खेलेंगे।