ले. जनरल सरत चंद ने छात्रावास के इतिहास की जानकारी से की। उन्होंने बताया कि 22 बीघा जमीन वर्ष 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मेजर जन. बीसी खंडूरी ने इस छात्रावास के लिए दी थी। खास बात यह है कि महज 18 माह के भीतर इस हॉस्टल का निर्माण पूरा हुआ है। इस काम में राज्य सरकार के स्तर से ढाई करोड़ रुपये की आर्थिक मदद भी मिली।
यहां स्कूल जाने आने के लिए बस की व्यवस्था, छात्रावास के अंदर ही चिकित्सीय सुविधा, पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब, ट्यूशन की सुविधा, प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग, कॅरियर काउंसिलिंग आदि की व्यवस्था है। हास्टल का अनुमानित शुल्क 88,800 से 95,400 रुपये सालाना तय किया गया है। शहीदों के बच्चों को शुल्क में छूट प्रदान की जाएगी। जनरल बिपिन रावत ने कहा कि चैत्र नवरात्र का आज पहला दिन है।
नवरात्र के पहले दिन छात्रावास का लोकार्पण एक शुभ प्रतीक के रूप में देखा जाना चाहिए। दूरस्थ क्षेत्र के छात्र यहां से मार्गदर्शन पाकर न केवल सेना बल्कि अन्य क्षेत्र में भी मुकाम हासिल करेंगे। उन्होंने कहा कि हिमाचल, अरुणाचल, नागालैंड, मणिपुर समेत विषम भौगोलिक परिस्थिति वाले क्षेत्रों में भी ऐसे छात्रावास खोले जाएंगे। सेना प्रमुख ने उप सेना प्रमुख को इस कार्य के लिये विशेष बधाई दी।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा ऐसा एक छात्रावास हल्द्वानी में भी खुलेगा। उन्होंने कहा कि यदि सेना चाहे तो सरकार इस ओर पहल करने को तैयार है। उन्होंने सैनिक स्कूल घोडाखाल की दुर्दशा सामने रखते कहा कि इसके लिए पांच करोड़ रुपये देने की घोषणा राज्य सरकार ने की है। जिसमें दो करोड़ जारी भी किए जा चुके हैं। उन्होंने पलायन को लेकर भी अपनी पीड़ा बयां की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पलायन पर सोचना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि हमारी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। यह आवश्यक है कि दूरस्थ क्षेत्रों को हम स्वरोजगार से जोड़ें। इस मौके पर पूर्व सीएम एवं वर्तमान सांसद मेजर जनरल बीसी खंडूरी ने कहा कि यह हम सबके लिए खास दिन है। हमें लगातार ऐसे प्रयास करने होंगे। मसूरी विधायक गणेश जोशी की छात्रावास निर्माण में अहम भूमिका रही।
उन्होंने कहा कि अगर सीएम अनुमति देंगे तो वह कारपस फंड के लिए विधायक निधि से 50 लाख रुपये देने को तैयार हैं। उन्होंने सेना के अधिकारियों के सामने कैंटीन में अधिक एक्साइज ड्यूटी का मामला भी उठाया। इसके अलावा कई और अहम मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि वह गढ़वाल राइफल्स के सच्चे सिपाही हैं। छात्रावास में मदद करना उनका सौभाग्य है। इस मौके पर उत्तर भारत एरिया के जीओसी ले. जनरल हरीश ठुकराल, आईएमए कमांडेंट ले. जनरल एसके झा, उत्तराखंड सब एरिया के जीओसी मेजर जनरल जेएस यादव, वीर नारियां, पूर्व अधिकारी और सैनिक मौजूद रहे।
कारपोरेट ने दी मदद
छात्रावास के निर्माण में कारपोरेट ने भी मदद दी है। कंपनियों ने सीएसआर के तहत यह मदद की है। इंडियन रिन्यूबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी ने 46.60 लाख रुपये की मदद से 75 किलोवाट का सोलर सिस्टम उपलब्ध कराया है। कजारिया टाइल्स प्राइवेट लिमिटेड ने 22.73 लाख रुपये की टाइल्स उपलब्ध कराई। जेन टेकभनोलॉजी ने 56 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी। मोएट हेन्नेसे इंडिया ने साज सामान के लिए 15 लाख रुपये की मदद की। ओएनजीसी ने 38.07 लाख रुपये की मदद की। शीला फोम लिमिटेड ने 250 गद्दे और तकिए दिए। त्रैंज प्राइवेट लिमिटेड ने 15 लाख दिए। अशोका लिलेंड 38 सीटर बस उपलब्ध कराएगा। एसबीआई लैंसडोन ने 99,600 रुपये और पीएनबी लैंसडोन ने 99,600 रुपये की वित्तीय मदद दी है। सभी को इस मदद के लिए स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।