जमरानी बांध निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता भारत भूषण पांडे का कहना है कि रूरल कांपैक्टेड कंक्रीट तकनीक से निर्मित की जाने वाले बांध निर्माण के लिए 24 गुणा 7 के हिसाब के काम करने की प्लानिंग करनी होगी।
केंद्र में रहेंगे अमृतपुर, दमुवढूंगा, बालाझाला, गौला
ईई भारत भूषण पांडे ने बताया कि सिंचाई विभाग की जमरानी, दमुवाढूंगा, बालाझाला और गौला में अपनी संपत्तियां और विभागीय आवास हैं। बांद निर्माण से पूर्व इस संपत्तियों और आवासों के उपयोग पर भी विचार विमर्श किया जाएगा।
नमामि गंगे की भी मिली एनओसी
जमरानी बांध परियोजना को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के बाद मंगलवार को केंद्र सरकार के नमामि गंगे परियोजना की ओर से भी एनओसी मिल गई है।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने भी एनओसी दिए जाने का आश्वासन दिया है। अब बुधवार को केंद्रीय वित्त मंत्रालय में जमरानी बांध परियोजना के कार्य में हुई प्रगति की समीक्षा के साथ ही बजट पर चर्चा होगी। जमरानी बांध परियोजना के अधीक्षण अभियंता संजय शुक्ल ने बताया कि नमामि गंगे की मंजूरी मिलने से अब वित्त मिलने की राह आसान हो गई है।
जमरानी बांध परियोजना को नया स्टाफ मिलने के बाद काम में तेजी आई है। जिस तत्परता और इच्छाशक्ति के साथ अधिकारियों के काम को आगे बढ़ाया है और एक के बाद एक एनओसी दिलाई हैं, इसके लिए उन्हें विशेष बधाई देता है।
- मोहन चंद्र पांडेय, मुख्य अभियंता सिंचाई विभाग