समाजसेवी सिद्धार्थ नैथानी ने वन विभाग पर लोगों का जीवन संकट में डालने का आरोप लगाया। कहा कि आए दिन हाथी जंगल से निकलकर उनके घरों के आगे धमक रहे हैं। कई बार विभाग के आधा अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इसकी शिकायत की गई, लेकिन हाथी को रोकने व लोगों की सुरक्षा को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
शाम ढलते ही लोग हाथी के डर से घरों में कैद होने को मजबूर हैं। उधर, कोटद्वार रेंज अधिकारी बीबी शर्मा ने बताया कि उन्हें ग्रास्टनगंज में हाथियों की धमक की जानकारी नहीं है। नागरिकों की सुरक्षा के लिए क्षेत्र में वन कर्मियों की गश्त बढ़ाई जाएगी।
हाथियों ने रौंदी गन्ने की फसल
वहीं हरिद्वार जिले के कटेबड़, डालूपुरी, चमरिया और लालढांग के जंगल से लगे खेतों में शाम ढलते ही हाथी आ धमकते हैं। अब तक किसानों की कई बीघा फसल को हाथी रौंद चुके हैं। चिड़ियापुर रेंज के रवासन क्षेत्र में बीती रात काली मंदिर के पास बस्ती से लगे कई खेतों में हाथी ने पूरी रात गन्ने की फसल को चट कर दिया। किसान मोहम्मद हनीफ, नसीम, कलुवा, रघुवीर सिंह नेगी, सूदन डबराल, बुंदु, मोहम्मद महबूब आदि का कहना है कि वन विभाग हाथियों की आवाजाही पर रोक नहीं लगा पा रहा है।