देहरादून जिले में डेंगू के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शुक्रवार को पांच और मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। ऋषिकेश का चंद्रेेश्वरनगर डेंगू का हॉट स्पॉट बना हुआ है। यहां अब तक डेंगू के 16 मरीज सामने आ चुके हैं। शुक्रवार को जिले में डेंगू के जो पांच रोगी मिले हैं, उनमें दो महिलाएं और तीन पुरुष हैं। रंजना गुप्ता (28) निवासी कुमारबाड़ा, ऋषिकेश एसपीएस अस्पताल ऋषिकेश में भर्ती हैं। सुरक्षा (30) और अबूजर (7) निवासी रक्षा विहार अधोईवाला कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती हैं। गौतम तनेजा (37) निवासी 23 इंदर रोड, मैक्स अस्पताल में भर्ती हैं। भोपाल सिंह रावत (39) निवासी डिब्बी विहार कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती हैं।
डेंगू के कुछ मरीजों को प्लेटलेट्स की जरूरत भी पड़ने लगी है। शहर के विभिन्न ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स की मांग बढ़ रही है। हालांकि, स्थिति अभी नियंत्रण में बताई जा रही है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. शशि उप्रेती ने बताया कि प्लेटलेट्स की मांग आ रही है। फिलहाल ब्लड बैंक में मांग के अनुरूप प्लेटलेट्स का स्टॉक है।
डॉक्टरों के अनुसार, डेंगू बुखार एडीज इजिप्टाई और एडीज एल्बोपिक्टस मादा मच्छर (टाइगर) के काटने से फैलने वाला वायरल बुखार है। डेंगू मच्छर के शरीर पर काले व सफेद रंग की पट्टियां होती हैं। यह ज्यादातर दिन में ही काटते हैं। एडीज मच्छर साफ व जमा पानी में पनपते हैं। ऐसे में ज्यादा दिनों तक पानी एकत्र न होने दें। एडीज मच्छर बर्तन, पानी की टंकी, कूलर, फूलदान, टूटी-फूटी बोतलों, नारियल की खोल, गमले, टंकी के ढक्कन के किनारे, पुराने टायर, डिब्बे आदि और पत्तियों व चम्मच भर पानी भी अगर एक सप्ताह तक ठहरा हो तो उसमें पैदा हो जाता है। डॉ. खन्ना ने बताया कि ठंड लगने के साथ अचानक तेज बुखार, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, आंखों के पिछलेे भाग में दर्द होना, अत्यधिक कमजोरी, भूख न लगना, गले में दर्द, शरीर पर लाल चकत्ते साधारण डेंगू बुखार के लक्षण हैं।
यह लगभग 5-7 दिन तक रहता है। रोगी परहेज करे तो स्वयं ठीक हो जाता है। हैमरेजिक डेंगू बुखार में साधारण डेंगू बुखार के लक्षणों के साथ-साथ त्वचा पर गहरे नीले, काले रंग के छोटे या बड़े चकत्ते पड़ना, नाक व मसूड़ों से खून आना आदि रक्तस्राव के लक्षण हैं। वहीं, डेंगू शॉक सिंड्रोम में हैमरेजिक बुखार के लक्षणों के साथ ही रोगी अत्यधिक बेचैन हो जाता है। तेज बुखार के बावजूद उसकी त्वचा ठंडी महसूस होती है। रोगी धीरे-धीरे होश खोने लगता है। नाड़ी तेज और कमजोर महसूस होती है। रक्तचाप कम होने लगता है।