दून में शुक्रवार को डेंगू के 16 नए मामले सामने आने से दहशत बढ़ गई है। अब तक शहर में कुल 170 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। बदलते मौसम में वायरल ने भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। शहर के सभी सरकारी अस्पतालों के वार्ड मरीजों से भरे पड़े हैं। सीएमओ ने बताया कि सभी अस्पतालों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
सीएमओ डॉ. सुशील अग्रवाल ने बताया कि डेंगू के 16 नए मरीजों का हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट, दून अस्पताल और मैक्स अस्पताल में इलाज चल रहा है। डेंगू के मरीजों की बढ़ती संख्या देखते हुए दून अस्पताल में सात बेड का एक अतिरिक्त वार्ड बनाया गया है।
सीएमओ का कहना है कि डेंगू के ज्यादातर मरीज हाल ही में बाहर से आए हैं। अधिकतर मामले हरिद्वार, पश्चिमी यूपी के हैं। इन क्षेत्रों में जिला रोग उन्मूलन अधिकारी को विशेष अभियान चलाने के निर्देश हैं। इसके अलावा दून अस्पताल, दून महिला और कोरोनेशन अस्पताल में पहुंचे वायरल के मरीजों की जांच की गई। इनमें से कुछ मरीजों में डेंगू के लक्षण मिलने पर उन्हें एलाइजा टेस्ट के लिए दून अस्पताल भेजा गया। दून अस्पताल के पीएमएस डॉ. आरएस असवाल ने बताया कि इस मौसम में वायरल सामान्य है।
सैकड़ों बच्चे चपेट में, सुरक्षा के लिए करें ये उपाय
शहर में पिछले कुछ दिनों से बच्चों में हाई ग्रेड फीवर के मामले बढ़ गए हैं। इससे डॉक्टर भी चिंतित हैं। डॉक्टरों का कहना है कि हाई ग्रेड फीवर को वायरल और डेंगू का शुरूआती लक्षण माना जा सकता है। दून अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एनएस खत्री के अनुसार, बच्चे को लंबे समय तक रहने वाले बुखार को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
बच्चों में हाई ग्रेड फीवर के मामले बढ़ गए हैं। इसमें डेंगू की आशंका हो सकती है। इसलिए बच्चे को बुखार और शरीर पर दाने या चकत्ते होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है। प्लेटलेट्स कम होने की वजह से बच्चे के शरीर पर ऐसे निशान हो सकते हैं। प्राथमिक उपचार के तौर पर गीली पट्टी से बच्चे का बुखार उतारने की कोशिश करें।
इन बातों का रखें ध्यान
- बच्चे को बुखार हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
- बुखार आने पर गीली पट्टी माथे पर लगाएं
- बच्चे को लगातार तरल पदार्थ देते रहें
- डॉक्टर की बताई दवाएं ही खिलाएं
- अपनी मर्जी या सुनी-सुनाई दवाएं न दें
-बच्चे को पूरी बाजू की कमीज पहनाएं
- ध्यान रखें कि डेंगू का मच्छर दिन में काटता है
खुद न बने डॉक्टर
मरीज को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा नहीं खानी चाहिए। आजकल सोशल साइट्स पर डेंगू से बचने और इलाज के तमाम तरह की दवाइयां बताई जा रही हैं। डॉक्टरों की माने तो इनकी प्रमाणिकता पर संदेह है। ऐसे में बिना डॉक्टर की सलाह के ऐसी दवाइयों के प्रयोग से बचें।
प्लेटलेट्स 10 हजार से कम तभी चढ़ाना जरूरी
डेंगू की आशंका के बीच लोगों में घबराहट भी बढ़ती जा रही है। प्लेट्लेट्स काउंट 70,000 से 80,000 होने पर लोग डॉक्टरों पर प्लेटलेट्स चढ़ाने का दबाव बना रहे हैं, इसके लिए सिफारिश तक करा रहे हैं।
दून अस्पताल के पीएमएस का कहना है कि ऐसे मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ा दी गई तो वास्तविक जरूरत वाले मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है। डॉक्टरों के मुताबिक स्वस्थ व्यक्ति में ढाई से तीन लाख प्लेटलेट्स होती हैं। ऐसे में किसी व्यक्ति में 10 हजार से कम प्लेटलेट्स होने पर ही इसे चढ़ाने की ज्यादा जरूरत होती है।
घबराएं नहीं, स्थिति अंडर कंट्रोल
स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टरों की माने तो प्रदेश में डेंगू फिलहाल नियंत्रण में है और विभाग ने डेंगू की रोकथाम और उपचार के लिए प्रभावी व्यवस्था की है। दून अस्पताल, जौलीग्रांट में संदिग्ध मरीजों का फ्री एलाइजा टेस्ट किया जा रहा है। दून अस्पताल में 16 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। इसके अलावा तमाम बड़े प्राइवेट अस्पतालों में भी अलग वार्ड बनाए गए हैं।
खून की कमी नहीं
दून अस्पताल के पीएमएस डॉ. आरएस असवाल ने बताया कि ब्लड बैंक में खून की कमी नहीं है। प्लेटलेट्स का भी संकट नहीं है। बताया कि खून से 48 घंटों के भीतर प्लेटलेट्स निकाले जा सकते हैं।