पछवादून में नदी व बरसाती नालों के किनारों पर बसी बरसों पुरानी बस्तियों को हटाने के लिए चल रही प्रशासन की कार्रवाई पर ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से हाईकोर्ट में भूमिधरों का पक्ष रखने के साथ अतिक्रमण हटाने की प्रशासन की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
पूर्व दर्जाधारी आकिल अहमद के नेतृत्व में भारी संख्या में तहसील मुख्यालय पर पहुुंचे ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि पछवादून का पूरा क्षेत्र नदी व बरसाती नालों का क्षेत्र है। यहां हर कदम पर कोई नाला या नदी मौजूद है। लेकिन इन्हीं नदी-नालों के किनारों पर ग्रामीणों की कृषि भूमि या आवासीय बस्ती भी स्थित हैं। यह बस्तियां आज के समय की नहीं हैं बल्कि बरसों से यहां पर हैं। ऐसे में अचानक से कार्रवाई करके सभी लोगों के घर-मकान, दुकान व कृषि भूमि को अतिक्रमण साबित कर देना एक गंभीर विषय है। सरकार को यह सोचना चाहिए कि इतनी बड़ी संख्या में बेघर होने वाले ग्रामीण व उनके परिवार कहां रहेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को हाईकोर्ट में नदी व नालों पर अतिक्रमण संबंधी मामले में जमीनी हकीकत का पक्ष रखना चाहिए जिससे कोर्ट किसी एक पक्ष की दलील के आधार पर कोई ऐसा फैसला नहीं दे सके।
उन्होंने कहा कि ऐसी बस्तियों में पचास और सौ साल से रह रहे ग्रामीणों के पास बिजली, पानी के कनेक्शन होने के साथ भारी संख्या में सड़कें व मकानों का निर्माण सरकारी पैसे से किया गया है। सरकार को इस प्रकार की सभी स्थितियों का आकलन करके उर्मिला थापा बनाम राज्य सरकार के मामले में मजबूती से अपना पक्ष रखना चाहिए। जिससे अनावश्यक तौर पर ग्रामीण परेशान न हों। इसके साथ ही उन्होंने तहसील प्रशासन के माध्यम से जारी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को तुरंत रोकने की मांग भी की। उन्होंने विकासनगर तहसील के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री व राज्यपाल को एक ज्ञापन भी प्रेषित किया। ज्ञापन देने वालों में जगदीश शर्मा, चौधरी राजू तोमर, अभय यादव, मोहम्मद शाहिद, अनवर, शमशीदा, साईन, जुबैदा, लक्ष्मी देवी, अनिल कुमार, अनीस, लालमुनि पासवान शामिल रहे।