Iकार्यकारी सदस्य आयूषी पैनयूली ने कहा, निजी विद्यालय मनमानी फीस ले रहे हैं। इसके अलावा पाठ्य सामग्री के लिए भी बढ़ाकर फीस ली जाती है। बसों की फीस भी बढ़ाई जा रही है। मध्यम वर्ग के लोग इतनी फीस नहीं दे सकते। कहा, निजी विद्यालयों की यूनीफार्म और किताबें विद्यालय या उनकी बताई दुकानों से लेने के लिए छात्रों और अभिभावकों को मजबूर किया जा रहा है। इसके लिए जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया गया। कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी न की गईं तो एबीवीपी उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।I
Iयशवंत पवार ने कहा, निजी विद्यालयों की फीस लगातार बढ़ती जा रही है। हर परीक्षा में अलग-अलग मनमाने ढंग से फीस को बढ़ा दिया जाता है। कहा कि इसमें नामी निजी विद्यालय भी शामिल हैं, इन पर पाबंदी लगनी चाहिए।I
Iबलवीर कुंवर ने कहा, हम 21वीं सदी में रह रहे हैं, जिसमें रोटी, कपड़ा, मकान के अलावा शिक्षा भी बहुत जरूरी है। कहा निजी विद्यालयों की फीस बढ़ती जा रही है और शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है। फीस के नाम पर निजी विद्यालय अपनी मनमानी करते हैं, अगर ये नहीं रुका तो हम ऐसे ही आंदोलन करते रहेंगे।I
Iप्रीतम सोमवाल ने कहा, ये विरोध प्रदर्शन निजीकरण को रोकने और निजी विद्यालयों की फीस को कम करने के लिए था। कहा सरकारी विद्यालय धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं, लोगों का रुझान निजी विद्यालयों की तरफ ज्यादा बढ़ रहा है और अगर निजी विद्यालय ऐसे फीस में वृद्धि करेंगे तो मध्यम वर्ग के बच्चे कैसे पढेंगे।
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