चुनौती और अवसर दोनों
सरकार जनसांख्यिकी लाभांश की अवधि को एक सुनहरा अवसर मान रही है। विकसित उत्तराखंड के लिए विकास का जो रोडमैप बनाया जा रहा है, उसमें रोजगार को केंद्र में रखा गया है। अनुमान है कि अगले एक दशक में काम-धंधे की तलाश में ग्रामीण आबादी जिसमें बड़ी संख्या युवाओं की होगी, राज्य के शहरों और नगरों का रुख करेंगे। इसलिए महानगर, शहर, नगर और अर्द्धनगरीय क्षेत्रों में सरकार को इको सिस्टम तैयार करना होगा। प्रमुख सचिव नियोजन आर. मीनाक्षी सुंदरम कहते हैं, इस दिशा में सरकार ने काम शुरू कर दिया है। कौशल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, विनिर्माण, सूक्ष्म एवं लघु उद्योग, स्टार्ट अप, मेक इन इंडिया, सर्कुलर इकोनॉमी, नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रों में निवेश बढ़ाकर युवा आबादी को कार्यशील बनाने के प्रभावी प्रयास होंगे। जानकारों का मानना है कि यदि ऐसा नहीं हो पाता है तो फिर अकार्यशील आबादी राज्य की अर्थव्यवस्था पर एक बड़ा दबाव और बोझ बन जाएगी और ये राज्य के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
राज्य सरकार ने काम शुरू किया
2047 तक विकसित भारत में राज्य के योगदान के लिए जो योजनाएं और नीतियां बनाई जा रही हैं, वे पूरी तरह से स्वरोजगार और आजीविका पर आधारित हैं। राज्य आर्थिक विकास दर को समृद्धि में बदलने के लिए सरकार करीब 35 नीतियां बनाई हैं, इनमें पर्यटन, सेवा क्षेत्र, आयुष, स्टार्ट अप, कीवी, शहद, मिलेट, सोलर, सेब नीति के तहत सरकार ने योजनाओं को खास तौर पर इस ढंग से तैयार किया है कि जिनसे स्वरोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ने के साथ राज्य की अर्थव्यवस्था का विस्तार होने की संभावना है।