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दून लिटरेचर फेस्टिवल: आज शिक्षक केवल कर्मचारी बनकर रह गए - सिसोदिया

Sun, 13 Oct 2019 10:21 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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मनीष सिसोदिया - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली के उपमुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि सरकारी शिक्षक आज महज कर्मचारी बनकर रह गए हैं। सरकार को कोई भी काम करवाना हो तो वह शिक्षकों पर डाल दिया जाता है। हमें समझना होगा कि शिक्षकों को नौकरी उनकी पढ़ाने की क्षमता देखकर दी गई है, इसलिए उनसे वही काम किया जाए।  

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देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल में सिसोदिया ने कहा कि हमने शिक्षकों को प्रशिक्षित किया, जिससे आज उम्दा शिक्षा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं हिंदी में सोचता हूं, इसलिए हिंदी ही बोलता हूं। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री बनने के बाद सबसे पहले मैंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए उठाए जाने वाले कदमों को लेकर सहयोगियों और अधिकारियों से चर्चा की।

हमारे सामने स्कूलों को सशक्त करने के साथ ही शिक्षकों और पाठ्यक्रम को बेहतर बनाने की चुनौती भी थी। वैसे भी बदलाव हमेशा चुनौतीपूर्ण होते हैं, लेकिन खुशी है कि हम पिछले पांच साल में काफ ी कुछ ऐसे बदलाव करने में सफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में 60 हजार से अधिक शिक्षकों की ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट पर काम किया। 

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अभिभावकों को बदलनी होगी मानसिकता

तीसरी कक्षा के बच्चे से अगर पूछा जाए कि वह भविष्य में क्या बनना चाहता है, तो जवाब होगा आईएएस, डॉक्टर या इंजीनियर, लेकिन हमें समझना होगा कि इतने छोटे बच्चे के दिमाग में यह समझ आई कहां से। दरअसल घर में परिवार, माता-पिता हर वक्त उस पर यही दबाव बनाते हैं कि उसे बड़ा होकर आईएएस, डॉक्टर या इंजीनियर बनना है। ऐसे में बच्चे के दिमाग में भी सिर्फ  वही बात चल रही होती है। माता-पिता को भी समझना होगा कि बच्चों पर जो दबाव डाल रहे हैं उससे न सिर्फ  उनके बच्चे बल्कि पूरे समाज को भी नुकसान पहुंच रहा है।

उत्तराखंड में हैप्पीनेस पर बोले, नहीं चलता कॉपी-पेस्ट

उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में दिल्ली सरकार के हैप्पीनेस प्रोग्राम को लागू किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि शिक्षा में कॉपी-पेस्ट व्यवस्था नहीं चलती है। खुद उन्होंने हैप्पीनेस प्रोग्राम को लागू करने से पहले कई जगह की शिक्षा व्यवस्था का अध्ययन किया था। उनकी अच्छी बातों को लेकर दिल्ली के हालातों के अनुसार प्रोग्राम तैयार किया गया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की स्थितियों को ध्यान में रखकर प्रोग्राम तैयार किया जाएं तो उसके सकारात्मक नतीजे आ सकते हैं।
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