वह हरिद्वार और उत्तर भारत में रेडीमेड व अन्य कपड़ों का कारोबार करता था। कारोबार के लिए उसने ज्वालापुर (हरिद्वार) की पंजाब नेशनल बैंक की शाखा से 75 लाख रुपये का लोन लिया था।
बैंक ने सुनील जैन को यह लोन 2010 से 2012 के बीच कई किश्तों में दिया। इसके लिए सुनील ने मुजफ्फरनगर, रुड़की में स्थित अपनी संपत्तियां और फर्म को बंधक के रूप में रखा।
इसके बाद छह माह तक सुनील जैन मय ब्याज लोन की किश्तें चुकाईं, लेकिन कुछ समय बाद उसने किश्तें चुकानी बंद कर दी। ऐसे में बैंक अधिकारियों ने पड़ताल की तो पाया कि उसने जो संपत्तियां गिरनी रखीं थी वे सभी फर्जी हैं। सिद्धार्थ इंडस्ट्री के नाम से कोई फर्म भी नहीं है।
इसके बाद विगत 10 दिसंबर 2016 को बैंक के सर्किल हेड की ओर से सुनील जैन व अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में सीबीआई की देहरादून शाखा में मुकदमा दर्ज कराया।
सीबीआई ने इस मामले में करीब तीन माह में चार्जशीट दाखिल की। मुकदमा चला जिसमें अभियोजन की ओर से कुल नौ गवाह पेश किए गए। मुकदमे में बैंक के कुछ कर्मचारी भी आरोपी बनाए गए थे।
इस मुकदमे में शुक्रवार को न्यायालय ने सजा सुनाई। सुनील जैन को धोखाधड़ी में पांच साल कठोर कारावास व 35 हजार रुपये जुर्माना, जालसाजी में पांच साल कैद व 35 हजार रुपये जुर्माना और फर्जीवाड़े में दो साल कैद व पांच हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। अदालत ने इससे अलग उस पर 75 लाख रुपये जुर्माना भी ठोंका है।