साइबर ठगों से रहें सावधान... डिजिटल अरेस्ट का नहीं कोई प्रावधान
साइबर अपराधियों ने खुद को पुलिस, सीबीआई, कस्टम्स या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर फोन करना शुरू कर दिया है। ऐसे ठग लोगों को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर या झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देकर उनसे पैसे ट्रांसफर कराने की कोशिश करते हैं। साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों को आगाह किया है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है।
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने कहा कि कोई भी सरकारी एजेंसी या जांच संस्था फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही जांच के नाम पर बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश देती है। ऐसे किसी भी कॉल पर घबराने के बजाय तुरंत कॉल काटें, संबंधित एजेंसी से सत्यापन करें और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या स्थानीय साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं। यदि कोई व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी बताकर फोन पर पैसे भेजने का दबाव बनाए, वीडियो कॉल पर निगरानी रखने या गिरफ्तारी की धमकी दे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। ऐसे कॉल पर घबराने के बजाय कॉल काट दें और किसी भी स्थिति में अपनी बैंकिंग या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
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छह माह बाद फिर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी
देहरादून। राजधानी में करीब छह माह बाद एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। ताजा मामले में साइबर ठगों ने खुद को एनआईए और एटीएस का अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग को आतंकवाद से जुड़े मामले में फंसाने का डर दिखाया और 13 लाख रुपये ठग लिए। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के बाद भी इस घटना ने एक बार फिर साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को उजागर किया है। देहरादून में इस वर्ष जनवरी-फरवरी के दौरान डिजिटल अरेस्ट के पांच मामले सामने आए थे। इसके बाद फरवरी से जुलाई तक इस तरीके से ठगी का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया। वर्ष 2025 में देहरादून में डिजिटल अरेस्ट के कुल 18 मामले दर्ज किए गए थे।