नाम- प्रीतम सिंह पंवार
पिता का नाम- स्व. मनोहर लाल पंवार
माता का नाम- कमला देवी
जन्मतिथि- 1 जनवरी 1966
स्थाई पता- ग्राम थान, जौनपुर, टिहरी गढ़वाल।
प्रारंभिक शिक्षा- प्राथमिक से इंटरमीडिएट तक की शिक्षा बड़ेथी, उत्तरकाशी।
स्नातक- डीएवी पीजी कॉलेज देहरादून।
राजनीतिक सफर
- 1984 में उत्तराखंड क्रांति दल में शामिल हुए।
- 1988 में पहली बार चिन्यालीसौड़ उत्तरकाशी से क्षेत्र पंचायत सदस्य चुने गए।
- 1994 में उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की।
- 1996 में जिला सहकारी बैंक उत्तरकाशी के निदेशक।
- 1996 में दोबारा चिन्यालीसौड़ उत्तरकाशी से क्षेत्र पंचायत सदस्य चुने गए।
- वर्ष 2000 से 2002 तक उत्तरकाशी जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष रहे।
- 2002 में पहली बार यूकेडी से यमुनोत्री विधानसभा सीट से विधायक बने।
- 2012 में दूसरी बार भी यूकेडी से ही यमुनोत्री सीट से विधायक बने। तत्कालीन कांग्रेस सरकार में पहली बार कैबिनेट मंत्री का दायित्व संभाला। पंवार को शहरी विकास, मत्स्य पालन, पशुपालन, कारगार जैसे बड़े विभागों का मंत्री बनाया गया।
- 2017 में टिहरी जिले की धनोल्टी विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल कर तीसरी बार विधायक बने।
धनोल्टी के निर्दलीय विधायक प्रीतम सिंह पंवार को पार्टी में शामिल कर भाजपा ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। भाजपा ने उन्हें पार्टी में शामिल कर कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों पर मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने के साथ ही धनोल्टी विधानसभा में पार्टी के अंदर गुटबाजी को भी थामने का काम किया है। 2017 में प्रचंड मोदी लहर के बावजूद पंवार ने धनोल्टी से जीत हासिल की थी। जबकि, जिले की छह में से पांच सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। धनोल्टी में चुनाव हारने का प्रमुख कारण पार्टी के अंदर आपसी गुटबाजी रही है।
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद पहली बार अस्तित्व में आई आरक्षित धनोल्टी विधानसभा सीट से 2002 के चुनाव में कांग्रेस के कौलदास ने जीत दर्ज की थी। 2007 में भाजपा के खजानदास विधायक बने। 2012 में सामान्य हुई सीट पर भाजपा के महावीर रांगड़ चुनाव जीते थे। लेकिन 2017 में पार्टी ने पूर्व खेल राज्य मंत्री नारायण सिंह राणा को मैदान में उतारा। लेकिन प्रचंड मोदी लहर के बाद भी आपसी गुटबाजी के कारण राणा चुनाव हार गए। प्रीतम सिंह पंवार 2017 में अपनी पंरपरागत विधानसभा सीट यमुनोत्री को छोड़कर धनोल्टी से निर्दलीय चुनाव जीतकर विधायक बने। 2019 में हुए पंचायत चुनाव में भी धनोल्टी विधानसभा क्षेत्र के थौलधार और जौनपुर ब्लॉक में ब्लॉक प्रमुख के पद पर निर्दलीय प्रत्याशी को जीत दिलाकर उन्होंने अपनी राजनीतिक ताकत का अहसास कराया। दोनों ब्लॉकों में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी चुनाव हार गए थे।
अब भाजपा ने विधायक प्रीतम पंवार की राजनीति ताकत को भांपते हुए उन्हें अपनी पाले में लाकर एक तीर से कई निशाने साधे हैं। विधानसभा चुनाव में अभी पांच माह का वक्त शेष रह गया है। लेकिन, धनोल्टी विधानसभा सीट पर भाजपा से दावेदारों की लंबी कतार है। सभी दावेदार धड़ों में बंटे हुए हैं। हालांकि पूर्व मंत्री नारायण सिंह राणा, पूर्व विधायक महावीर रांगड़, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष सुभाष रमोला, पूर्व जिलाध्यक्ष व दायित्वधारी संजय नेगी, राजेश नौटियाल टिकट के लिए जोड़तोड़ में लगे हुए हैं। भाजपा ने प्रीतम को शामिल कर राजनीति गुटबाजी को थामने का प्रयास किया है। पंवार मृदुभाषी और व्यवहार कुशल होने के साथ ही चुनाव प्रबंधन में भी माहिर हैं। पंवार 2002 में यमुनोत्री से उक्रांद से विधायक बने थे, लेकिन 2007 में चुनाव हार गए थे। 2012 में निर्दलीय विधायक बनकर कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे।