तत्कालीन राज्यपाल डा. केके पॉल ने जब मंच से ज्योतिष को लेकर व्याख्यान दिया तो बेजन समेत वहां मौजूद तमाम विद्वान आश्चर्यचकित रह गए। बेजन अपनी जगह से उठे और उन्होंने केके पॉल को सैल्यूट किया।
इसके बाद काफी देर तक बेजन लोगों से मिले और उनके सवालों के जवाब दिए। ये बेजन की लोकप्रियता ही थी कि अन्य ज्योतिषी जहां अलग-अलग कमरों में बैठे। बेजन को लोगों ने जाने नहीं दिया और मजबूरी में मंच पर उनके लिए कुर्सी और टेबल लगाकर बैठने की व्यवस्था की गई।
काफी अधिक उम्र होने के बावजूद उन्होंने काफी देर तक लोगों से मुलाकात की और उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया। समस्याएं लेकर आए लोग उनसे मिलने के बाद समाधान देकर लौटे तो उनके चेहरे पर खुशी साफ पढ़ी जा सकती थी।
ग्राफिक एरा के बाद जब वो जीएमएस रोड स्थित होटल सैफ्रॉन लीफ (जहां उनके ठहरने का इंतजाम किया गया था) पहुंचे तो वहां भी कई लोग उनका इंतजार करते मिले। लोग उनसे मिलना और अपनी बात कहना चाहते थे। भीड़ के बीच होटल के जीएम विनोद श्रीवास्तव बमुश्किल उन्हें कमरे तक पहुंचा सके। यहां भी लगातार उनसे मिलने वालों का सिलसिला जारी रहा।
अगले दिन होटल में ही ज्योतिष महाकुंभ का समापन और सम्मान समारोह आयोजित होना था। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बेजन को ज्योतिष के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया। उन्होंने मंच से हरीश रावत के दोबारा मुख्यमंत्री बनने की घोषणा की।
ज्योतिष महाकुंभ खत्म होने के बाद भी कई दिन तक बेजन दून में ही रहे। इस दौरान उनसे मुलाकात करने के लिए शहर की तमाम बड़ी हस्तियां होटल पहुंची थी। जाते समय बेजन ने वायदा किया कि वो अगले साल होने वाले ज्योतिष महाकुंभ में जरूर आएंगे। लेकिन इसी बीच हुए विधानसभा चुनावों में हरीश रावत को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। दो जगह से चुनाव हारने के साथ ही वो सत्ता से बेदखल हो गए। उसके बाद बेजन दून नहीं आए। उनके कद्रदानों के जेहन में आज भी उस कार्यक्रम की यादें ताजा हैं।