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Vikasnagar Encroachment: शक्ति नहर किनारे अवैध निर्माण पर दूसरे दिन भी गरजा बुलडोजर, पुलिस तैनात

Mon, 20 Mar 2023 09:26 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, विकासनगर

सार

Vikasnagar Encroachment News Today: जल विद्युत निगम ने अपनी जमीन से खुद कब्जे हटाने के लिए नोटिस दिया था। जिसके बाद रविवार से अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू कर दिया गया।
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विकासनगर में हटाया गया अतिक्रमण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शक्ति नहर के किनारों पर जलविद्युत निगम की जमीनों को खाली कराने के लिए लगातार दूसरे दिन अभियान चलाया गया। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि बारिश आने के कारण लगभग चार घंटे तक अभियान रुका रहा। बारिश बंद होने के तुरंत बाद भवनों को गिराने की कार्रवाई फिर से शुरू हो गई। शाम होने तक प्रशासन व निगम की टीम ने डेढ़ सौ अवैध निर्माण को धराशायी कर दिया।

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Vikasnagar Encroachment: अतिक्रमण पर गरजा बुलडोजर, भारी पुलिस बल तैनात, लोगों ने खाली की बस्ती, तस्वीरें

सोमवार की सुबह लगभग दस बजे एक बार फिर से निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई, जिसमें नवाबगढ़-डाकपत्थर क्षेत्र में व्यापक स्तर पर मकान, दुकान व अन्य निर्माण गिराए गए। कार्रवाई के दौरान अफरा-तफरी का वातावरण बना रहा। भवनों में रह रहे लोग प्रशासन से मकानों को नहीं तोड़ने की गुहार लगाते दिखाई दिए लेकिन प्रशासन ने अपना अभियान जारी रखा।
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बताते चलें कि जलविद्युत निगम ने डाकपत्थर से लेकर ढ़करानी स्थित शक्ति नहर के पांवटा रोड पुल तक छह सौ निर्माण गिराने के लिए कार्रवाई शुरू की थी। जिसके पहले चरण में रविवार को ढ़करानी व नवाबगढ़ में तीन सौ निर्माण गिराए गए थे। निगम का अनुमान था कि दो दिनों में कार्रवाई को पूरा कर लिया जाएगा लेकिन दोपहर एक बजे शुरू हुई बारिश शाम चार बजे तक चलती रही, जिसके चलते अभियान को रोकना पड़ा। बारिश रुकने के बाद पांच बजे एक बार फिर से कार्रवाई शुरू की गई।

निगम व प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में डेढ़ सौ अवैध निर्माण को गिराया गया है। बाकी बचे निर्माण को भी शीघ्र गिराकर जमीन को खाली करा लिया जाएगा।
- विमल डबराल, एपीआरओ, जलविद्युत निगम

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ये है पूरा मामला

डाकपत्थर से कुल्हाल तक 15 किमी लंबी शक्ति नहर के दोनों किनारों पर जल विद्युत निगम की 15 हेक्टेयर जमीन पर बनी बस्तियों को खाली कराने की कार्रवाई पहली बार 2018 में नोटिस के साथ शुरू हुई। अब हाल ही में एक और तीन मार्च को नोटिस दिए गए। इसके बाद नौ कब्जाधारियों के हाईकोर्ट जाने पर निगम ने इनके नोटिस वापस ले लिए थे। इसके चलते याचिका निस्तारित हो गई। इसके बाद निगम ने शनिवार सुबह कब्जाधारियों को 24 घंटे में बस्तियों को खाली करने के नोटिस दिए थे।
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