एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि आरोपी का मोबाइल टूटा हुआ मिला है। ऐसे में फोन से डाटा निकालने के लिए तकनीकी टीम और फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। फोन में मौजूद इंटरनेट सर्च, गूगल गतिविधि, कॉल लॉग, मैसेजिंग एप और लोकेशन संबंधी जानकारी की जांच की जा सकती है। इससे यह भी पता चल सकेगा कि वारदात से पहले आरोपी ने हत्या से संबंधित कोई जानकारी इंटरनेट पर तलाश की थी या नहीं।
इसके अलावा पुलिस उस अवधि की डिजिटल गतिविधियों को भी जोड़ रही है, जब आरोपी पहली बार घर से निकलकर दोबारा लौटा था। इस दौरान उसने किसी परिचित को फोन किया, मैसेज भेजा या किसी से ऑनलाइन संपर्क किया था तो उसकी जानकारी जांच की दिशा बदल सकती है। पुलिस अब डिजिटल साक्ष्यों को घटनास्थल और सीसीटीवी फुटेज से मिलाकर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।