स्पीकर ने बताया कि 17 दिसंबर को सचिवों का सम्मेलन होगा, जिसमें लोकसभा एवं राज्यसभा के महासचिव प्रतिभाग करेंगे।
18 दिसंबर को अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन का उद्घाटन होगा, इसके बाद अलग-अलग विषयों पर सत्र होंगे।
इससे पूर्व लोस अध्यक्ष आयोजन स्थल में स्थानीय उत्पादों पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। इसमें 20 स्टाल लगाए जाएंगे।
फिर कार्यक्रम में छोलिया नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी। उत्तराखंड के 19 साल की यात्रा पर एक वृत चित्र भी दिखाया जाएगा।
19 दिसंबर को समापन सत्र में राज्यपाल का संबोधन होगा। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष की एक प्रेस वार्ता भी होगी।
इसी दिन शाम को सभी अतिथि ऋषिकेश के लिए प्रस्थान कर जाएंगे। आशीर्वाद वाटिका, डोईवाला में भी कार्यक्रम होगा।
सभी अतिथि ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट पर सांयकालीन गंगा आरती एवं भजन संध्या में शामिल होंगे।
इन मसलों पर हो सकती है चर्चा
पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में संविधान की 10वीं अनुसूची में अध्यक्ष की भूमिका और सदस्यों के दल परिवर्तन के आधार पर उन्हें अयोग्य ठहराने से संबंधित उपबंधों पर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा शून्यकाल सहित सभा के अन्य साधनों के माध्यम से संसदीय लोकतंत्र का सुधारीकरण एवं क्षमता निर्माण विषय पर भी मंथन होगा। संसदीय मामलों से जुड़े अन्य समसामयिक विषय लोस अध्यक्ष की अनुमति से चर्चा में शामिल हो सकते हैं।