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दो लाख लोगों को मिलेगा सॉफ्ट पानी 

Fri, 02 Jun 2017 02:32 PM IST
नलिनी गुसाईं / अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : demo
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देहरादून की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक पानी की हार्डनेस का जल्द समाधान होने वाला है। राज्य का पहला साफ्टनिंग प्लांट पुरकुल में बनकर तैयार है। अभी इससे दो लाख लोगों को निर्मल पानी मिलेगा। 
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उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में पानी में हार्डनेस की सबसे अधिक दिक्कत है। जिसके चलते जहां पाइप लाइन चोक हो जाती है। गीजर और आरओ खराब हो जाते हैं। लोगों को गठिया जैसी बीमारी से जूझना पड़ता है। एडीबी की ओर से उत्तराखंड शहरी विकास निवेश कार्यक्रम के तहत पुरकुल में बने प्लांट से यह सभी परेशानियां दूर हो सकेंगी। 

उत्तराखंड में अधिकतर जगहों पर प्राकृतिक स्त्रोत से पानी मिलता है। इस पानी में सबसे अधिक समस्या कैल्शियम की अधिकता की रहती है। जिसे हार्ड पानी कहा जाता है। पानी की हार्डनेस की वजह से सबसे अधिक दिक्कत पाइप लाइनों के बंद होने की आती है। पाइपों में कैल्शियम की मोटी-मोटी परत जम जाती है।
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नई पाइप लाइनों में कैल्शियम जमने से पानी का प्रेशर कम हो जाता है। एडीबी फंडेड उत्तराखंड शहरी विकास निवेश कार्यक्रम के तहत 12 करोड़ की लागत से पुरकुल में ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किया गया है। यह राज्य का पहला ऐसा ट्रीटमेंट प्लांट है। जो पानी की हार्डनेस को पूरी तरह से खत्म कर देगा। हालांकि इसका फायदा पुरकुल सहित अपर राजपुर के क्षेत्रों के दो लाख लोगों को ही मिलेगा। 

ये होगा फायदा
पाइप लाइन, नल, गीजर, आरओ नहीं होंगे खराब
गठिया जैसी बीमारियां नहीं होंगी
कपड़े धोते हुए झाग बन सकेगा
दाल जल्दी गल सकेगी आदि

पूरी तरह से रहेगा मानवरहित 
इस ट्रीटमेंट प्लांट का फायदा यह होगा कि यह पूरी तरह से मानवरहित रहेगा। इसमें कोई आदमी काम नहीं करेगा बल्कि यह ऑटोमेशन में रहेंगे। यहां सिर्फ एक चौकीदार होगा। इसके साथ ही पूरी सिस्टम वाटर वर्क्स में बैठे अधिकारी वहीं से चलाएंगे।

ऐसे करेगा प्लांट काम 
इसमें पानी विभिन्न चरणों से होकर गुजरेगा। सबसे पहले पानी क्लेरी फ्लोकुलेटर प्रक्रिया से गुजरेगा जिससे स्लज पानी में नीचे बैठ जाएगा। इसके बाद एरिशन फाउंटिंग से पानी की बदबू दूर होगी। आयन एक्सचेंज बेसिस प्रक्रिया से गुजरने के बाद पानी की हार्डनेस दूर होगी। फ्लैश मिक्सर से पानी आपस में पूरी तरह से मिक्स होगा। फिल्टर बैंड से फिल्टर होने के बाद सॉफ्टनिंग प्लांट से पानी की हार्डनेस को पूरी तरह से खत्म किया जाएगा। इसके बाद पानी में क्लोरीन डाल इसे पूरी तरह से शुद्ध बना लोगों को दिया जाएगा।  

अब तक राज्य में कुछ जगहों पर पानी के ट्रीटमेंट प्लांट तो हैं लेकिन सॉफ्टनिंग प्लांट नहीं थे। जबकि यहां सबसे अधिक दिक्कत हार्ड पानी की ही है। राज्य के पहले इस प्लांट से लोगों को सॉफ्ट पानी मिल सकेगा। यह प्लांट पूरी तरह से मानवरहित रहेगा। वहीं अब तक लोग कहने को तो पेयजल ले रहे हैं लेकिन बिना आरओ के कोई पानी नहीं पीता। जबकि यह पानी पूरी तरह से आरओ से निकलने वाले पानी की तरह होगा, जिसे सीधा पीने में इस्तेमाल किया जा सकता है। 
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- झरना कमठान, अपर कार्यक्रम निदेशक, उत्तराखंड शहरी विकास निवेश कार्यक्रम 
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