119 करोड़ से चलने थे कचरा निस्तारण के कई प्रोजेक्ट
कचरा निस्तारण कर दून को ग्रीन सिटी बनाने के लिए 119 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया था। इस प्रोजेक्ट में वेस्ट मैनेजमेंट पर फोकस था। सिटीज 2.0 के लिए भेजे गए प्रस्ताव में कुल बजट 119 करोड़ रुपये तय किया गया था। कार्ययोजना के मुताबिक कूड़े की छंटाई के लिए 250 टन क्षमता का प्लांट लगाया जाना था। 100 टन क्षमता का प्लांट लगाकर प्रतिदिन गीले कचरे का निस्तारण करना था। गीले कूड़े से गोलियां बनाकर बायोगैस का उत्पादन करने की तैयारी थी। भवनों की तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे से टाइल्स और सीमेंट की ईंट बनाने का प्लांट लगाना प्रस्तावित था। अब यह कार्ययोजना फाइलों में रह गई।
नगर निगम की लापरवाही ने भी दिलाई मात
इस योजना में चयन का मुख्य आधार बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन रखा गया था। इसमें दून पहले ही बहुत पीछे है। पिछले पांच सालों से कचरे का पहाड़ शीशमबाड़ा में खड़ा है। निगम के पास कूड़ा निस्तारण के लिए भरपूर बजट और तंत्र होने के बाद भी इस दिशा में लापरवाही का अंजाम स्मार्ट सिटी को भुगतना पड़ा। शहरी विकास मंत्रालय ने कूड़ा निस्तारण के लिए कोई नया प्रोजेक्ट दून में स्वीकार नहीं किया।
देश के सौ शहरों ने सिटीज 2.0 परियोजना के लिए आवेदन किया था, इसमें देहरादून स्मार्ट सिटी भी शामिल था। 18 शहरों को चुना गया है। सिटीज 1.0 में दून को शामिल किया गया था, लेकिन इस बार दून स्मार्ट सिटी लिमिटेड शामिल नहीं हो सका। परियोजना के शेष कार्यों को पूरा कराया जा रहा है।
- सोनिका, सीईओ, दून स्मार्ट सिटी लि.