देहरादून को स्मार्ट सिटी शहरों की सूची में शामिल कराने का श्रेय लेने की बेशक होड़ मची हुई है, लेकिन केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की कार्यशालाओं में भाग लेकर लौटे अधिकारियों की मानें तो दून का स्मार्ट सिटी बनना सपना ही है।
दरअसल, इस योजना के लिए दस सालों में केंद्र सरकार से केवल 70 करोड़ रुपए ही मिलेंगे। अधिकारी इस रकम को ऊंट के मुंह में जीरा बता रहे हैं। शहरी विकास मंत्रालय के अधिकारियों ने स्मार्ट सिटी योजना को तीन चरणों में बांटा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि देहरादून में योजना के अनुसार काम किया गया तो तकरीबन 1600 करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी।
पीपीपी मोड में केंद्र का क्या काम?
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय साफ कर चुका है कि स्मार्ट सिटी के लिए ज्यादा बजट नहीं मिलेगा। इसके अधिकतर काम पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड (पीपीपी) पर होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि पीपीपी मोड पर काम करवाना राज्य का विषय है। ऐसे में केंद्र की इसमें क्या जरूरत है? यह भी स्पष्ट नहीं है कि योजना के तहत लोगों को विस्थापित किया गया तो मुआवजा कौन देगा? केंद्र सरकार या फिर राज्य सरकार?
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तीन चरण
पहला चरणः रेट्रो सिटी- क्षेत्रफल पांच एकड़। अनुमानित लागत 100 करोड़
इस चरण में पुरानी इमारतों की मरम्मत की जानी है। पार्कों के सुंदरीकरण के साथ यातायात व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। सरकारी और गैर सरकारी इमारतें की सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी।
दूसरा चरणः ग्रीन फील्ड - क्षेत्रफल करीब 50 एकड़। अनुमानित लागत 500 करोड़
दूसरे चरण में शहर की सड़कें चौड़ी की जाएंगी। नए पार्क और इमारतों का निर्माण किया जाएगा। पर्यावरण के लिहाज से ग्रीन बेल्ट विकसित की जाएगी। ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पूरी तरह आटोमेटिक होगी। इसमें आप्टो ट्रेन समेत एडवांस ट्रांसपोर्ट सिस्टम शामिल होगा।
तीसरा चरणः सेटेलाइट सिटी। क्षेत्रफल ढाई सौ एकड़। अनुमानित लागत 1000 करोड़
चंडीगढ़ और एनसीआर की तर्ज पर नया शहर विकसित होगा। इस चरण का खाका अभी तैयार किया जा रहा है।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से आयोजित सेमिनारों में बताया गया है कि स्मार्ट सिटी में अधिकतर काम पीपीपी मोड के तहत होंगे। जो भी कार्य प्रस्तावित हैं उन्हें राज्य सरकार भी करा सकती है। बताया गया है कि केंद्र से केवल 70 करोड़ रुपए का बजट जारी होगा। देहरादून के लिहाज से यह राशि नाकाफी है। ऐसे में, हमें अपने स्तर पर ही स्मार्ट सिटी बनानी होगी।
- आर मीनाक्षी सुंदरम, उपाध्यक्ष, मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण