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श्री मुरारीलाल माहेश्वरी वाद-विवाद प्रतियोगिता: देहरादून की साक्षी ने पाया पहला स्थान

Sat, 22 Feb 2020 03:32 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • उत्तरांचल यूनिवर्सिटी स्थित लॉ कॉलेज ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ फाइनल, वक्ताओं ने पक्ष व विपक्ष में रखे तर्क
  • मुख्य अतिथि पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी ने किया सभी विजेताओं व प्रतिभागियों को पुरस्कृत
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विजेता छात्रा साक्षी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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श्री मुरारीलाल माहेश्वरी राज्य स्तरीय वाद विवाद प्रतियोगिता में एसजीआरआर पीजी कॉलेज देहरादून की छात्रा साक्षी बडोनी विजेता बनीं। उत्तरांचल यूनिवर्सिटी में प्रतियोगिता का फाइनल हुआ। प्रदेशभर से चुनकर आए वक्ताओं ने विषय के पक्ष व विपक्ष में अपने-अपने तर्क रखे। समापन अवसर पर मुख्य अतिथि पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी ने सभी विजेताओं और प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। 

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यूनिवर्सिटी स्थित लॉ कॉलेज ऑडिटोरियम में उत्तरांचल विवि के कुलाधिपति जितेंद्र जोशी, लॉ कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश बहुगुणा और अमर उजाला उत्तराखंड स्टेट एडिटर संजय अभिज्ञान ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्रतियोगिता में गढ़वाल और कुमाऊं मंडल से चुनकर आए विजेता शामिल हुए।

 उन्होंने ‘संघवाद सशक्त देश के लिए अनिवार्य है’ विषय पर अपनी-अपनी राय रखी। विषय के समर्थन और विरोध में उन्होंने कई तथ्य व आंकड़े भी पेश किए। साथ ही इतिहास, दुनियाभर के अलग-अलग देशों की घटनाओं, भारतीय संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए अपनी बात को मजबूती से रखा। लॉ कॉलेज देहरादून के प्राचार्य डॉ. राजेश बहुगुणा, सामाजिक व राजनीतिक चिंतक अनूप नौटियाल और पॉलिटिकल साइंस के एक्सपर्ट डॉ. केएस रंधावा निर्णायक की भूमिका निभाई।
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ये रहे प्रतियोगिता के विजेता
विजेता- साक्षी बड़ोनी, एसजीआरआर पीजी कॉलेज, देहरादून
फर्स्ट रनर अप- ऊषा पांडे, नैनीताल
सेकेंड रनर अप- धीरज कौशल, टिहरी
प्रथम सांत्वना पुरस्कार- राजेंद्र कुमार, अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग
द्वितीय सांत्वना पुरस्कार- राहुल कुमार, अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग

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भाषाई आधार पर राज्यों के नाम रखने से कमजोर हुआ संघवाद

भाषाई आधार पर राज्यों के नाम रखने से देश में संघवाद कमजोर हुआ। अगर अलग-अलग भाषाओं के आधार पर राज्यों के नाम नहीं रखे जाते तो शायद संघवाद ज्यादा बेहतर स्थिति में होता।

बतौर मुख्य अतिथि श्री मुरारीलाल माहेश्वरी राज्य स्तरीय वाद विवाद प्रतियोगिता के फाइनल अवसर पर छात्रों को संबोधित करते हुए पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत कई अलग-अलग विविधता वाले राज्यों का एक देश है। इसमें भौगोलिक, सांस्कृतिक और सामाजिक भिन्नता बहुत ज्यादा है। हर हिस्से की अपनी अलग समस्याएं और मुद्दे हैं।

ऐसे में केवल केंद्रीय व्यवस्था के भरोसे इस विशाल देश को संभालना काफी मुश्किल हो सकता था। उन्होंने कहा कि अगर राज्यों का नाम भाषाओं के आधार पर नहीं होता तो शायद देश में संघवाद ज्यादा बेहतर होता। बंगाल का विभाजन आजादी से पहले हो गया था, लेकिन उसकी भाषा बांग्ला के आधार पर बंगाल का नाम पड़ा।

दक्षिण में केवल आंध्र प्रदेश ऐसा राज्य है, जिसका नाम भाषा के नाम पर नहीं है। उन्होंने कहा कि भाषाओं के आपसी द्वंद्व ने संघवाद को कमजोर करने का काम किया। भाषा आधारित राज्यों में भाषाई आंदोलन ज्यादा हुए, जिससे उनका संघवाद से जुड़ाव अपेक्षाकृत कम रहा। 
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