प्रमोशन में आरक्षण समेत कई अन्य मांगों को लेकर प्रदेश भर में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों ने जिला मुख्यालयों पर जोरदार नारेबाजी के बीच प्रदर्शन किया और रैलियां निकाली। इस दौरान उन्होंने जिलाधिकारियों के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
राजधानी देहरादून में उत्तराखंड एससी एसटी इंप्लाइज फेडरेशन के बैनर तले कर्मचारी परेड ग्राउंड में जुटे जहां उन्होंने धरना दिया। इस दौरान जिला अधिकारी के प्रतिनिधि के तौर पर एडीएम परेड ग्राउंड पहुंचे जहां उन्होंने फेडरेशन से ज्ञापन लिया। फेडरेश के प्रदेश अध्यक्ष करम राम ने उन्हें ज्ञापन पढ़कर सुनाया।
फेडरेशन के आह्वान पर सुबह करीब 11 बजे अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारी परेड ग्राउंड के नजदीक लैंसडौन चौक स्थित धरना स्थल पर एकत्रित हुए। यहां उन्होंने पहले जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया और उसके बाद वे धरने पर बैठ गए। इस दौरान हुई सभा में फेडरेशन नेताओं ने सरकार को आगाह किया कि यदि उसने संविधान प्रदत्त आरक्षण के प्रावधानों के खिलाफ कोई फैसला किया तो इसका मुंह तोड़ दिया जाएगा।
उन्होंने एससी, एसटी व ओबीसी कर्मचारियों का तीन जनवरी को होने वाली प्रदेशस्तरीय आक्रोश रैली में बढ़-चढ़कर शिरकत करने का आह्वान किया। धरना स्थल पर कांता प्रसाद, रणवीर सिंह तोमर, सीएस ग्वाल, चंद्रशेखर, मटनलाल, हरिसिंह, एसएस मुयाल, जितेंद्र बुटोइंया, रोहित कुमार, राजेंद्र सिंह, मालती देवी, गुड्डी देवी, सुभाष चंद्र, भागेश्वरी समेत कई अन्य फेडरेशन नेता उपस्थित थे।
सात सूत्रीय मांग पत्र सौंपा
- उच्च न्यायालय के 15 नवंबर के आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एसएलपी वापस ली जाए व इंदु कुमार कमेटी व जस्टिस इरशाद हुसैन आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक कर उसका परीक्षण हो। रिपोर्ट के अनुसार एससी एसटी का सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व पूर्ण न होने की स्थिति में तत्काल कानून बनाकर प्रमोशन में आरक्षण बहाल हो
-सीधी भर्ती में रोस्टर की समीक्षा को गठित कौशिक समिति की जब तक रिपोर्ट नहीं आती, तब तक वर्ष 2001 के रोस्टर के आधार पर सीधी भर्ती हो
-राज्य स्थापना जनजाति के रोस्टर को शून्य मानकर उक्त तिथि से ही पदोन्नति व सीधी भर्ती में जनजाति का रोस्टर प्रारंभ किया जाए
-अन्य पिछड़ा वर्ग को राजकीय सेवाओं में निर्धारित 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत आरक्षण किया जाए व पदोन्नति में भी आरक्षण दिया जाए
-राज्य में विभिन्न विभागों में बैकलॉग के रिक्त पदों को विशेष भर्ती अभियान के तहत तत्काल भरा जाए
-सरकारी संस्थानों में संविदा/आउटसोर्स के माध्यम से की जा रही नियुक्तियों में भी आरक्षण का शत प्रतिशत अनुपालन हो
-उच्चतम न्यायालय के अंतिम फैसले के अधीन (सशर्त) डीपीसी पर रोक हटाने पर विचार होता है तो ये रोस्टर के आधार पर हो