राजधानी देहरादून में इन दिनों आरटीओ विभाग ओवरलोडिंग पर अभियान छेड़े हुए है। हालांकि इस टीम को शराब और ओवर स्पीड पर आंखें मूंदनी पड़ रही है।
वजह, राजधानी के आरटीओ विभाग के पास एल्कोहल मीटर और रेडार गन है ही नहीं। ऐसे में बिना हथियारों के ही आरटीओ विभाग सड़कों पर उतर रहा है।
दून का हाल अन्य राजधानियों से अलग
देश के लगभग सभी राजधानियों का आरटीओ विभाग सड़कों पर ज्यादा चौकस रहता है। लेकिन दून का हाल अन्य राजधानियों से अलग है। यहां पर सड़कों पर आरटीओ विभाग प्रवर्तन की टीम को जरूरी उपकरण दिए ही नहीं गए है।
ऐसे में पिछले कई सालों से टीम ने ओवर स्पीड और शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ अभियान नहीं चला पाई है। एआरटीओ संदीप सैनी ने बताया शासन को लिखा है। वहां से आश्वासन मिला है कि जल्द ही जरूरी उपकरण मिल जाएंगे।
लाखों की इंटरसेप्टर खा रही जंक
सन 2006 में आरटीओ विभाग को छह इंटरसेप्टर वाहन मिले। यह वाहन हर तरह के उपकरण से लैस थे। इंटरसेप्टर गढ़वाल रेंज के हर जिले के लिए थे। लेकिन वक्त के साथ इंटरसेप्टर खराब होने लगे। लेकिन उन्हें ठीक करने या सर्विसिंग के लिए बजट आरटीओ कार्यालय को मुहैया नहीं कराया गया। नतीजन उत्तरकाशी की इंटरसेप्टर दून के आरटीओ परिसर में खड़ी सड़ चुकी है। सूत्रों के अनुसार, यही हाल अन्य इंटरसेप्टरों को भी है।
पुलिस भी बिना हथियारों के
राजधानी की ट्रैफिक पुलिस भी बिना हथियार के सड़कों पर उतरती है। लेकिन, आश्चर्य इस बात है कि बिना एल्कोहल मीटर और रेडार गन के भी ट्रैफिक पुलिस इन दोनों में चालान करती है। अब कार्रवाई कैसे होती है। यह भी रोचक है। ट्रैफिक पुलिस के जवान मुंह की बदबू सूंग कर शराबी का पता लगाती है और ओवर स्पीड का अंदाजा लगाया जाता है।