बनाना होगा एक रिजर्व फंड, पांच साल तक नहीं निकालेंगे पैसा
इस बैठक में संभावित धोखाधड़ी के मामलों के मद्देनजर एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। अब प्रमोटर्स को एक रिजर्व फंड भी बनाना होगा। इसके लिए बैठक में सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। इसमें आवंटियों से प्राप्त होने वाली धनराशि का एक अंश जमा कराना होगा। इस फंड से प्रमोटर्स परियोजना पूरी होने के पांच वर्षों बाद तक कोई पैसा नहीं निकाल सकेंगे। यही नहीं इसके बाद भी अगर पैसा निकालना है तो इसके लिए भी रेरा से अनुमति लेनी होगी। ऐसे में अगर कोई बिल्डर भाग जाता है या परियोजना लंबे समय से अधूरी है तो इस फंड से पैसा आवंटियों को दिया जा सकेगा। इस फंड में आवंटियों से आने वाली रकम में से कितनी राशि जमा करानी होगी इसके लिए निर्धारण प्रक्रिया बाद में शुरू की जाएगी। अगर परियोजना में कोई कमी होगी तो इसी फंड से यह कमी भी दूर कराई जाएगी।
परियोजना विस्तार संबंधी जानकारी भी करनी होगी सार्वजनिक
खाता संख्या के अलावा प्रमोटर्स को परियोजना के अवधि विस्तार और पंजीकरण संशोधन की जानकारी भी अखबारों के माध्यम से सार्वजनिक करनी होगी। पुरानी पंजीकृत परियोजना को निरस्त कर उसमें नया पंजीकरण प्राप्त किए जाने के लिए प्राप्त होने वाले आवेदन पर स्वीकृति जारी करने से पहले प्राधिकरण की ओर से आवंटियों की आपत्तियों को भी अखबार में प्रकाशित कराना होगा। आपत्तियां यदि प्राप्त होती हैं तो उनका समयबद्ध निस्तारण करना भी आवश्यक होगा। ऐसा न करने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
रेरा को राज्य में और अधिक मजबूती प्रदान की जाएगी। इससे राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप राज्य में एक स्वस्थ पारदर्शी रियल एस्टेट इकोसिस्टम विकसित हो सकेगा। इसमें खरीदारों के हित पूरी तरह से सुरक्षित करने के लिए रेरा लगातार काम करेगा। रियल एस्टेट का कारोबार करने वाले तत्वों पर सख्ती से शिकंजा भी कसा जाएगा।
- नरेश सी मठपाल, अध्यक्ष, रेरा