इस रास्ते के पुलिस नाकों के बारे में शशांक जान चुका था। वह अपने इन साथियों को वर्चुअल नंबरों से व्हाट्सएप पर ही रूट की जानकारी देता रहा। उसने रास्ते पर देखा कि कार और बाइक में काफी अंतर हो गया है। ऐसे में पकड़े जाने के डर से उसने ऑनलाइन ही रूट बदल दिया।
बदमाशों को नदी किनारे से भागने को बताया। इसके बाद उन्होंने सहसपुर क्षेत्र में बाइक और कार को छोड़ा और नदी किनारे से भाग निकले। इसके अलावा भी कई ऐसी जानकारियां पुलिस को मिली हैं जिनकी तस्दीक की जा रही है। एसएसपी ने बताया कि इस गैंग के कुछ और सदस्यों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
बेऊर जेल के बारे में गृह मंत्रालय को देंगे जानकारी
एसएसपी ने बताया कि बेऊर जेल में शशांक से पहले भी कई अपराधी मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे थे। शशांक के वर्चुअल सिम बनाने की ट्रिक जानने के बाद यह इस्तेमाल और भी बढ़ गया। अब शशांक पकड़ा गया है तो पुलिस बिहार सरकार को इसके बारे में पत्र भेजने जा रही है। इसके साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी एक पत्र लिखा जा रहा है, जिसके माध्यम से बेऊर जेल की सारी हकीकत बताई जाएगी।
साथी राजीव को लड़ना था विधानसभा चुनाव
आरोपी ने पुलिस को बताया कि सुबोध और उसके खिलाफ कई आपराधिक मुकदमे थे। राजीव ने उससे कहा था कि उसे 2025 में विधानसभा चुनाव लड़ना है। इसके लिए शशांक व सुबोध को पुराने मामलों में जमानत करवानी है। उसने प्लान बनाया कि अब से जो भी घटना होगी उसमें मोबाइल के जरिए घटना करने वाली टीम से शशांक ही बात करेगा। यदि बहुत ही महत्वपूर्ण हुआ तो वह भी बात कर सकता है। जून 2023 में वर्चुअल सिम के माध्यम से पहली घटना महाराष्ट्र के सांगली में की गई थी।