मालिक न होने पर 1958 में दी गई थी रक्षा मंत्रालय को
इस जमीन का कोई मालिक नहीं था। इस पर किसी ने 1958 तक हक भी नहीं जताया। लिहाजा, तत्कालीन जिलाधिकारी ने इस जमीन को रक्षा मंत्रालय को दे दिया था। रक्षा मंत्रालय वर्तमान में भी इस जमीन पर काबिज है। लेकिन, इस बात का जालसाजों को पता नहीं था। उन्होंने इस जमीन के सहारनपुर के रजिस्ट्रार कार्यालय से कागज लिए और वर्ष 2016 में फर्जी दस्तावेज से बैनामा दर्शा दिया।
सहारनपुर के कर्मचारी भी आए राडार पर
अभी तक जो भी मामले सामने आए उनके दस्तावेज देहरादून स्थित कार्यालयों से जुटाकर तैयार किए गए थे। लेकिन, यह पहला मामला है जिसमें सहारनपुर के भी कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई है। ऐसे में अब एसआईटी सहारनपुर के कुछ कर्मचारियों को भी गिरफ्तार कर सकती है।