ईस्टरली-वेस्टरली वेदर सिस्टम से हुई मूसलाधार बारिश
प्रदेश में हुई मूसलाधार बारिश के बाद हर कोई इस बात के लिए चिंतित दिखा कि आखिर इतनी बारिश कैसे हुई। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मूसलाधार बारिश का मुख्य कारण ईस्टरली-वेस्टरली वेदर सिस्टम का मिलना रहा। ईस्टरली हवाएं पूर्व से पश्चिम की ओर चलती हैं, जबकि वेस्टरली हवाएं पश्चिम से पूर्व की ओर चलती हैं। ये दोनों हवा प्रणालियां पृथ्वी के घूमने के कारण कोरिओलिस प्रभाव से उत्पन्न होती हैं, जो वायुमंडलीय परिसंचरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक सीएम तोमर ने बताया कि मानसून के दिनों में अक्सर यह वेदर सिस्टम देखने को मिलता है लेकिन 15 और 16 सितंबर को इसका प्रभाव अधिक देखने को मिला। इसके चलते प्रदेशभर के कई इलाकों में भारी से भारी बारिश हुई। हालांकि इस वेदर सिस्टम का प्रभाव अब कम हुआ है।
अभी मानसून की विदाई का करना होगा इंतजार
उत्तराखंड में इस साल सामान्य से अधिक बारिश हुई है। अब हर कोई मानसून की विदाई का इंतजार कर रहा है लेकिन इसके लिए अभी इंतजार करना होगा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आमतौर पर सितंबर के आखिरी दिनों में मानसून की विदाई होती है लेकिन इस बार बारिश को देखते हुए अभी इंतजार करना होगा।
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आज देहरादून और नैनीताल में भारी बारिश के आसार
प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में बुधवार को भी तेज दौर की बारिश की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार देहरादून और नैनीताल जिले के कुछ इलाकों में भारी से भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा अन्य जिलों में भी तेज दौर की बारिश की संभावना है। आने वाले दिनों की बात करें तो 22 सितंबर तक प्रदेशभर में हल्की बारिश के आसार हैं।