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आईएएस स्टिंग मामला: फर्जी कार्रवाई में फंसी दून पुलिस, उमेश शर्मा ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ दी तहरीर

Fri, 10 May 2019 06:09 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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उमेश कुमार - फोटो : अमर उजाला
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उत्तराखंड में मुख्यमंत्री और उनके करीबियों के स्टिंग आपरेशन में निजी चैनल के सीईओ उमेश कुमार शर्मा के खिलाफ कार्रवाई में पुलिस खुद ही उलझ गई है। शर्मा का आरोप है कि दून पुलिस ने कोर्ट से गिरफ्तारी और सर्च वारंट लेने में फर्जीवाड़ा किया।

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उन्होंने फर्जी दस्तावेज को आधार बनाकर गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने को तहरीर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने यह फर्जीवाड़ा मुख्यमंत्री, आईजी और एसएसपी के इशारे पर किया है। उधर, गाजियाबाद पुलिस किसी तरह की तहरीर मिलने से इंकार कर रही है। हालांकि, उमेश शर्मा ने इंदिरापुरम थाने के रजिस्टर में एंट्री के अलावा तहरीर देने के बाद थाने से बाहर निकलते समय अपनी फोटो भी मीडिया को उपलब्ध कराई है।

यह था मामला

बता दें कि निजी चैनल के कर्मचारी आयुष गौड़ की तरफ से राजपुर थाने में सीईओ उमेश कुमार शर्मा, आयुर्वेद विवि के तत्कालीन कुलसचिव मृत्युंजय मिश्रा समेत पांच लोगों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग और वसूली की धारा में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस काफी समय तक मुकदमे को छिपाने में कामयाब रही थी। विवेचक ने अगस्त माह में कोर्ट से गिरफ्तारी और सर्च वारंट लेकर 28 अगस्त को गाजियाबाद स्थित घर से उमेश कुमार को गिरफ्तार किया था।

मामले में पुलिस ने शुरुआत में तीखे तेवर दिखाए, जो वक्त के साथ ढीले पड़ते चले गए। तब से लगातार पुलिस बैक फुट पर है। साक्ष्यों की कमी के चलते उमेश शर्मा समेत दो लोगों के खिलाफ दी गई चार्जशीट में ब्लैकमेलिंग और चौथ वसूली की धारा को हटाना पड़ा था। यही हश्र झारखंड के रांची में उमेश शर्मा के खिलाफ दर्ज हुए राष्ट्रदोह के मुकदमे का भी हुआ। इस मामले में उमेश की एक याचिका नैनीताल हाईकोर्ट में लंबित है, इसमें 14 मई को सुनवाई होनी है। 

एंट्री रजिस्टर की प्रति में भी हुआ घालमेल

तहरीर में बताया गया कि उमेश कुमार के एटीएस इंदिरापुरम (गाजियाबाद) स्थित आवास पर वारंट की तामिल दिखाने के लिए सोसायटी के गेट नंबर चार के एंट्री रजिस्टर में विवेचक अरविंद कुमार ने फ्लैट नंबर वाले खाने में लिखा टी-19 यानि टावर-19। इसके बाद अरविंद कुमार ने टावर में लिफ्ट के पास स्थित गार्ड के रजिस्टर में एंट्री करते समय फ्लैट नंबर का खाना खाली छोड़ दिया। एंट्री का समय 3:55 बजे दर्शाया और वापसी का समय 3:59 लिखा।
 
तहरीर में कहा गया है कि उमेश कुमार 24वीं मंजिल पर रहते हैं। लिफ्ट से वहां पहुंचने में करीब दो से ढाई मिनट का समय लगता है। वापसी भी इतने ही समय में संभव है। कोर्ट में दी गई पुलिस की याचिका में कुल चार मिनट में वारंट का तामिल ना होना और परिवार वालों का वारंट ना लेना बताया गया है। आरोप है कि अरविंद कुमार ने गेट नंबर चार और टावर 19 के रजिस्टर में एंट्री करने के दौरान इनके फोटो खींच लिए थे।
 
अरविंद कुमार ने गेट नंबर चार के रजिस्टर में, जिसके फ्लैट नंबर वाले खाने में टी-19 लिखा था, उसकी फोटोस्टेट कापी पर फ्लूड लगाकर उमेश कुमार के फ्लैट का नंबर 19241 डाला। जो रजिस्टर टावर 19 की लिफ्ट के पास स्थित गार्ड के पास था, उसमें खाली छोड़े गए खाने में भी बाद में फ्लैट नंबर 19241 लिखा गया।

स्टिंग प्रकरण में कब क्या हुआ

10 अगस्त - स्टिंग प्रकरण में राजपुर थाने में मुकदमा दर्ज
22 अक्टूबर - राजपुर पुलिस ने कोर्ट से सर्च और गिरफ्तारी वारंट हासिल किया
28 अक्टूबर - गाजियाबाद स्थित आवास से उमेश शर्मा की गिरफ्तारी
29 अक्टूबर - उमेश शर्मा को आठ नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा
31 अक्टूबर - उमेश शर्मा की सात घंटे की रिमांड मंजूर
01 नवंबर - पुलिस ने उमेश को रिमांड पर लेकर पूछताछ और मसूरी रोड स्थित घर में तलाशी की
01 नवंबर - उमेश शर्मा के खिलाफ राजपुर थाने में एक और मुकदमा दर्ज
02 नवंबर - उमेश शर्मा को कस्टडी रिमांड पर लेने की पुलिस की अर्जी खारिज
02 नवंबर - उमेश शर्मा की जमानत निचली अदालत से खारिज
04 नवंबर - झारखंड की राजधानी रांची में उमेश के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा
08 नवंबर - सेशन कोर्ट में उमेश की जमानत याचिका दाखिल
16 नवंबर - सेशन कोर्ट ने उमेश की जमानत याचिका मंजूर की
10 अप्रैल- पुलिस ने उमेश शर्मा समेत दो के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल
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मेश कुमार शर्मा की तरफ से देहरादून पुलिस के खिलाफ इंदिरापुरम थाने में कोई तहरीर नहीं मिली है। यदि कोई तहरीर आती है तो जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी। -उपेन्द्र अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गाजियाबाद।

निजी चैनल के सीईओ उमेश कुमार शर्मा के खिलाफ अदालत से वारंट प्राप्त करने में नियमानुसार कार्रवाई की गई है। वारंट सही नाम और सही पते पर लिया गया था। फ्लैट नंबर 19241 में उमेश शर्मा के सिक्योरिटी में लगे जवान रहते हैं। पेशबंदी में इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। सोसायटी के रजिस्टर अस्थाई अभिलेख है। हो सकता है कि उनमें किसी तरह की त्रुटि हो गई हो। पुलिस की जीडी में इसका पूरा उल्लेख किया गया है।   
-अरविंद कुमार, उप निरीक्षक।

मैंने स्वयं थाने में तहरीर दी है। सत्ता पक्ष से जुड़ा मामला होने की वजह से पुलिस नकार रही है। पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया तो कोर्ट के माध्यम से मामला दर्ज करवाने का विकल्प खुला है।
-उमेश शर्मा
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