पीड़ित महिला फुटेज लेकर पहले लक्खीबाग चौकी पहुंची, जहां से उन्हें खुड़बुड़ा चौकी भेज दिया गया। वहां पुलिस ने मोबाइल चोरी की तहरीर लेने से इंकार कर दिया। पुलिस का कहना था कि वे मोबाइल गुम होने की तहरीर दे सकती हैं।
सिम्मी इसके लिए तैयार नहीं हुई और शिकायत लेकर एसएसपी ऑफिस पहुंच गईं। एसएसपी के ऑफिस से निर्देश जारी हुए तो पुलिस सक्रिय हो गई। चोरी की तहरीर रिसीव करने के साथ मोबाइल चोर की ढूंढ मच गई।
खुड़बुड़ा चौकी पुलिस ने 90 मिनट में मोबाइल चोर की न केवल पहचान की, बल्कि उसे दबोच भी लिया। चौकी लाकर पूछताछ की गई तो आरोपी ने कार से मोबाइल चोरी करने की बात स्वीकार करने में देरी नहीं की। आरोपी ने बताया कि चोरी का मोबाइल वह 900 रुपये में बेच चुका है। पुलिस रात में आरोपी को साथ लेकर मोबाइल बरामद करने का प्रयास कर रही थी।
घरेलू महिला होते हुए सिम्मी आहूजा ने हिम्मत नहीं हारी। कार से मोबाइल चोरी होने के बाद सिम्मी ने परिजनों की मदद से खुद ही कई सीसीटीवी कैमरों से चोर के फुटेज का संकलन किया। फुटेज को लेकर ही सिम्मी पुलिस के पास गई। पुलिस किसी भी कीमत पर चोरी की तहरीर पकड़ने को तैयार नहीं थी।
पुलिस महिला पर मोबाइल गुम होने की तहरीर देने का दबाव बनाती रही। लेकिन, पुलिस दबाव के आगे भी सिम्मी झुकी नहीं है। पीड़ित महिला फरियाद लेकर सीधे एसएसपी ऑफिस पहुंच गई। एसएसपी तो सिम्मी को नहीं मिले, लेकिन पीआरओ ऑफिस के दरोगा विपिन बहुगुणा, उप निरीक्षक सरिता शाह और दीवान धर्मेन्द्र विष्ट ने पीड़ित की बात सुनने के साथ फु टेज का अवलोकन किया।
पीआरओ ऑफिस से सीधे पुलिस को चोरी का मुकदमा दर्ज कार्रवाई करने को कहा गया। महिला एसएसपी ऑफिस से फिर खुड़बुड़ा चौकी गई। जहां पर पुलिस ने चोरी की तहरीर को रिसीव किया। सिम्मी यदि दूसरों की तरह घर जाकर बैठ जातीं तो सिर्फ 90 मिनट में चोर पकड़ लेने का कारनामा पुलिस नहीं दिखा पाती।