प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अभी पहाड़ों पर पर्यटन सीजन के हिसाब से चलता है। मार्च, अप्रैल, मई, जून के महीने में बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। इसके बाद गिनती बहुत कम हो जाती है। सर्दियों में अधिकतर होटल, रिसॉर्ट और होमस्टे खाली पड़े रहते हैं। यह असंतुलन साल के एक बड़े हिस्से में आर्थिक सुस्ती ला देता है। उन्होंने शीतकालीन पर्यटन की उत्तराखंड सरकार की पहल को सराहते हुए आर्थिक असंतुलन दूर करने के लिए पर्यटन क्षेत्र में विविधता लाने, उसे बारहमासी बनाने की जरूरत बताई।
लोग भूल गए, हम नहीं भूल सकते
प्रधानमंत्री ने कहा कि पहाड़ों पर अब इको लॉग हट्स, कन्वेंशन सेंटर, हेलीपैड इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस किया जा रहा है। उत्तराखंड के टिम्मर-सैण महादेव, माणा गांव, जादुंग गांव में पर्यटन ढांचे को नए सिरे से विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, देशवासियों को पता होगा, शायद नहीं भी होगा, 1962 में जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया, तब हमारे जादुंग गांव को खाली करवा दिया गया था। हमारे दो गांव खाली कर दिए गए थे। 60-70 साल हो गए, लोग भूल गए, हम नहीं भूल सकते, हमने उन दो गांवों को फिर से बसाने का अभियान चलाया है और बहुत बड़ा टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने हाल ही में माणा गांव में हिमखंड गिरने से हुए हादसे में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि भी दी।
जीवनदायिनी मां गंगा ने मुझे गोद ले लिया
पीएम ने कहा कि जीवनदायिनी मां गंगा के शीतकालीन गद्दी स्थल पहुंचकर वह खुद को धन्य महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा, मां गंगा की कृपा से मुझे दशकों तक उत्तराखंड की सेवा का सौभाग्य मिला। उन्हीं के आशीर्वाद से मैं काशी पहुंचा और सांसद के रूप में काशी की सेवा कर रहा हूं। इसलिए, मैंने काशी में कहा भी था-मुझे मां गंगा ने बुलाया है। कुछ महीने पहले मुझे ये भी अनुभूति हुई कि जैसे मां गंगा ने मुझे अब गोद ले लिया है। अपने इस बच्चे के प्रति उनका स्नेह ही है कि आज मैं उनके मायके मुखवा गांव पहुंचा।