देहरादून के स्मार्ट सिटी के दायरे में न आ पाने की एक वजह केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान में फिसड्डी रहना भी है।
प्रदेश स्वच्छ भारत अभियान की रैकिंग में सबसे नीचे आ गया है। केंद्र के सर्वे में उजागर हुआ है कि स्वच्छ भारत अभियान में प्रदेश में कार्यों की स्थिति मानक के बहुत नीचे रही है। इसकी लो मार्किंग का असर स्मार्ट सिटी के मामले में भी पड़ा है। केंद्र ने वर्ष 2016-17 के लिए फिर सर्वे शुरू करा दिया है।
स्वच्छ भारत अभियान की सर्वे रिपोर्ट के बाद विभिन्न प्रदेशों की रेटिंग जारी हुई। इसमें उत्तराखंड निचले पायदान पर आ गया। अभियान के केटेलॉग में जो बिंदु दिए गए हैं, उनमें किसी भी बिंदु पर मानक के अनुसार काम नहीं हुआ है। सूत्रों का कहना है कि देहरादून सातवें पायदान से 70वें पायदान पर आ गया है। रेटिंग का सबसे निचला पायदान 75वां है। एक अभियान की मार्किंग का प्रभाव दूसरे अभियान और योजना के ग्राफ पर पड़ता है।
स्वच्छ भारत अभियान के तहत प्रदेश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय बनाए जाने थे। इसके साथ ही क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण आदि कार्यक्रम भी शामिल रहे हैं। वर्ष 2016-17 में काम की स्थिति ठीक रही तो ग्राफ बढ़ सकता है। सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद शासन ने निदेशक शहरी विकास से डा. वी. षणमुगम का तबादला कर दिया। इनके स्थान पर नितिन भदौरिया को जिम्मेदारी दी गई है। अभियान के मानकों के हिसाब से कार्य की रिपोर्ट के बाद केंद्र अभियान के मद की अवशेष धनराशि जारी करेगा।