दिल्ली की युवती को अवैध रूप से नशा मुक्ति केंद्र में रखने के आरोप में केंद्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। यह मुकदमा दिल्ली से ट्रांसफर होकर दून के नेहरू कॉलोनी में आया है। आरोप है कि युवती नशे की आदी नहीं थी। बावजूद, इसके नशा मुक्ति केंद्र वालों ने उसे 22 दिनों तक वहां बंद रखा। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
दिल्ली में द्वारिका के बिंदापुर थाने में जीरो एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले में मनीषा कुमारी निवासी मीतनगर शाहदरा ने हाईकोर्ट दिल्ली को शिकायत की थी। शिकायत के अनुसार उत्तमनगर निवासी स्वीटी नाम की उसकी दोस्त नशे की आदी नहीं थी। बावजूद इसके उसे 20 अक्तूबर 2020 को देहरादून के मोहकमपुर स्थित गोल्डन ड्रीम रिहेबिलिएशन सेंटर में भर्ती कराया गया था। स्वीटी को उसकी मां संपत्ति विवाद के चलते यहां लेकर आई थी।
इस मामले में मनीषा पहले भी दिल्ली पुलिस को यह सब बताया था, जिसके बाद 12 नवंबर को उसे वहां से रेस्क्यू करा लिया गया। इसके बाद स्वीटी ने हाईकोर्ट दिल्ली को अपने साथ हुई इस घटना के बारे में बताया। हाईकोर्ट ने बिंदापुर थाने को नशा मुक्ति केंद्र के संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे। एसओ नेहरू कॉलोनी राकेश गुसाईं ने बताया कि दिल्ली से आई जीरो एआईआर को यहां दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है।
फ्लैट को लेकर है विवाद
स्वीटी नौकरी करती थी। उसके मां और भाई शाहदरा में रहते हैं। भाई को भी नशा मुक्ति केंद्र में रखा गया था। स्वीटी की दोस्त मनीषा ने फोन पर बताया कि स्वीटी ने अपनी कमाई से उत्तम नगर में एक फ्लैट लिया था। इस फ्लैट पर उसके परिवार वालों की नजर थी। मनीषा का आरोप है कि इस फ्लैट को अपने नाम कराने के लिए ही उन्होंने यह साजिश रची थी। इसीलिए उसे नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करा दिया गया। स्वीटी वर्तमान में मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रही है।