खून न निकले इसलिए अगले दिन किए शव के टुकड़े
हिमांशु चौधरी एमबीबीएस की चतुर्थ वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। उसने गीता से कहा था कि वह काफी समय तक सर्जरी विभाग में रहा है। ऐसे में उसे पता था कि यदि 24 घंटे बाद शव को काटा जाए तो खून नहीं निकलेगा। लिहाजा, दोनों ने इंतजार किया और शव को अगले दिन काटने की योजना बनाई। अगले दिन हिमांशु ने रसोई के चाकू से ही शव को जोड़ के हिस्सों से काटा। पहले शव के कंधों से हाथ काटे गए। इसके बाद दोनों पैर अलग किए गए। बाद में सिर को काटकर प्लास्टिक के बोरे में रख दिया। षड्यंत्र के तहत गीता अजय को शव ठिकाने लगाने के लिए कह चुकी थी।
ये है पूरा मामला
गत सात फरवरी को श्यामलाल गुरुजी की बेटी निधि राठौर ने पटेलनगर थाने में अपने पिता की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। बताया था कि श्यामलाल दो फरवरी को किसी काम की बात कहकर घर से निकले थे। पुलिस ने मामले में जांच शुरू की और उनके फोन की अंतिम लोकेशन पता की। यह लोकेशन सिरमौर मार्ग की निकली। उनके फोन में गीता नाम की महिला से कई बार बातचीत थी। गीता की लोकेशन भी सिरमौर मार्ग पर थी। पुलिस जब वहां पहुंची तो देखा कि गीता और उसका पति हिमांशु गायब थे। इस पर पुलिस ने गीता के मायके देवबंद संपर्क किया। वहां उसके भाई अजय से बात हुई तो उसने सारी कहानी उगल दी। बताया था कि गीता ने दो फरवरी को फोन किया था कि उसने किसी की हत्या कर दी है। उसका शव ठिकाने लगाना है। इसके लिए अजय कुमार ने अपने जीजा धनराज चावला को बुलाया और चार फरवरी को देहरादून पहुंच गए। यहां उन्होंने लाश के टुकड़ों से भरा बोरा उठाया और उसे देवबंद सुखना नहर में फेंक दिया। लाश के दो टुकड़े सहारनपुर पुलिस ने 16 फरवरी को बरामद कर लिए थे। मीडिया में जब खबरें चलीं तो उन्होंने देहरादून पुलिस को सूचना दी। पुलिस परिजनों को वहां लेकर पहुंची तो शव के इन टुकड़ों की पहचान उन्होंने श्यामलाल के रूप में की।