किसानों ने अनुभव साझा किए
संस्थान में मंत्री चौहान ने किसानों से बात कर उनके अनुभवों को जाना। सहरानपुर जिले मांडुवाला से आए किसान टी राम ने बताया कि उनका पहले क्षेत्र असिंचित था, संस्थान के माध्यम से करीब साढ़े तीन किमी पाइप लाइन के माध्यम से सिंचाई की व्यवस्था की गई, जिससे खेती बेहतर हुई और आय भी बढ़ी। अजीत कौर बांस की खेती के बाद हुए लाभ के बारे बताया। किसान अंकित शाह ने भी पौधरोपण के लाभ के बारे में बताया। अन्य किसानों ने बताया कि वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से मृदा अपरदन में कमी आई है। जल संचयन संरचनाओं से जल उपलब्धता में सुधार हुआ है। संस्थान के माध्यम से स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को आचार तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया था। इन स्वयं सहायता समूह के सदस्यों ने इसके बाद आजीविका सुधार के बारे में बताया।बांस से जुड़ी योजनाओं के बारे में भी कृषि मंत्री को बताया गया। इस दौरान राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति उपाध्यक्ष विनय कुमार रुहेला, डॉ. चरण सिंह, डॉ. जेएमएस. तोमर, डॉ. डीवी. सिंह, गिरीश भट्ट, डॉ बांके बिहारी, वैज्ञानिक अमित चौहान, डॉ. सदिकुल इस्लाम आदि मौजूद थे।